हल्द्वानी में बड़ा दस्तावेज़ घोटाला: हिंदू दंपति के नाम पर फर्जी ईमेल बनाकर रईस अहमद के लिए तैयार किया स्थायी निवास प्रमाणपत्र

अवैध कब्जे में मदद का आरोप

हल्द्वानी में बड़ा दस्तावेज़ घोटाला: हिंदू दंपति के नाम पर फर्जी ईमेल बनाकर रईस अहमद के लिए तैयार किया स्थायी निवास प्रमाणपत्र

haldwani-fake-documents-ghotala-csc-faizan-miqrani

उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले के हल्द्वानी में दस्तावेज़ फर्जीवाड़े का एक संगठित मामला सामने आया है, जिसमें सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) कर्मचारी फैज़ान मिक्रानी पर आरोप है कि उन्होंने हिंदू दंपति देवेंद्र पांडे और उनकी पत्नी नंदी पांडे के नाम पर फर्जी ईमेल आईडी बनाईं और उन्हीं के पुराने दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करते हुए रईस अहमद के नाम से उत्तराखंड का फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र तैयार कर दिया। बताया जा रहा है कि इस फर्जी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल बाद में सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़े के लिए किया गया और विभिन्न योजनाओं का लाभ पाने में भी मदद मिली।

पूरा मामला तब सामने आया जब कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को शिकायत मिली और जांच में कुछ सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत के संकेत भी मिले। इसके बाद गुरुवार (12 नवंबर)को बानभूलपुरा क्षेत्र में स्थित दो सीएससी केंद्रों पर छापेमारी की गई। निरीक्षण के बाद आयुक्त ने दोनों सेंटर संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए।

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि फैज़ान मिक्रानी हल्द्वानी तहसील में क्लर्क भी हैं, उत्तर प्रदेश के निवासी रईस अहमद के नाम पर स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी किया, लेकिन प्रमाण पत्र जिस व्यक्ति के लिए बनाया गया वह पूरी तरह अलग था। यह फर्जीवाड़ा तब उजागर हुआ जब बरेली के मूल निवासी असली रईस अहमद ने शिकायत कर बताया कि उनके नाम पर अवैध रूप से दस्तावेज़ तैयार किए गए हैं।

छापेमारी में फैज़ान के घर और सीएससी केंद्र से कई संवेदनशील दस्तावेज़ बरामद हुए, जिनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, पुराने बिजली बिल और अन्य सरकारी रिकॉर्ड शामिल थे। बताया गया कि फैज़ान ने इन दस्तावेज़ों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कई फर्जी पहचान और प्रमाण पत्र बनाने में किया। आयुक्त रावत ने इसे लंबे समय से चल रहे एक संगठित फर्जीवाड़े का हिस्सा बताया और सभी तहसीलों में पारदर्शिता तथा कठोर सत्यापन प्रक्रिया लागू करने पर जोर दिया।

जांच में यह भी सामने आया कि फैज़ान का दूसरा सीएससी केंद्र बंद मिला, जिसके बाद आयुक्त ने चेतावनी दी कि बिना अनुमति तहसील परिसर में केंद्र संचालित करना दंडनीय अपराध होगा। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से देवेंद्र पांडे, नंदी पांडे और एक अन्य व्यक्ति जलीस से बात की, जिनके नामों का दुरुपयोग कर फर्जी ईमेल आईडी बनाई गई थीं। अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि ऑनलाइन दस्तावेज़ सत्यापन में किन सरकारी कर्मचारियों की भूमिका रही। विशेष तौर पर पुराने बिजली बिलों के बार-बार उपयोग से यह संकेत मिलता है कि फर्जी कागज़ात को आसानी से वैध मान लिया जाता था।

यह मामला बानभूलपुरा क्षेत्र में बढ़ते अवैध कब्ज़ों से भी जुड़ता है। आरोप है कि फैज़ान द्वारा बनाए गए फर्जी प्रमाणपत्रों का उपयोग कर कई लोगों ने खुद को उत्तराखंड का स्थायी निवासी दिखाकर सरकारी ज़मीन पर कब्जा जमाया और योजनाओं का लाभ लिया।

बानभूलपुरा का अतीत भी इस संदर्भ में संवेदनशील रहा है। फरवरी 2024 में जब प्रशासन ने सरकारी भूमि पर बनी एक मदरसे को तोड़ने की कार्रवाई की, तब क्षेत्र में भारी हिंसा भड़क उठी थी। भीड़ ने पुलिस पर हमला किया, वाहनों को आग लगाई और पुलिस स्टेशन को घेर लिया। इसके अलावा, हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर लगभग 4,000 परिवार अवैध रूप से बसे हुए थे, जिनके हटाने के प्रयासों के दौरान भी बड़ा विरोध हुआ था। रेलवे विभाग लंबे समय से पटरियों के विस्तार में बाधा बने इन कब्ज़ों की शिकायत कर रहा था।

हल्द्वानी में उभरा यह नया दस्तावेज़ फर्जीवाड़ा बताता है कि किस तरह पहचान और निवास संबंधी कागजातों का दुरुपयोग कर अवैध कब्ज़े और लाभ लिए जा रहे थे। जांच अब कई सरकारी कार्यालयों तक पहुँच चुकी है और अधिकारियों ने साफ संकेत दिया है कि दोषियों पर सख़्त कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें:

टिम कुक जल्द छोड़ सकते हैं एप्पल का नेतृत्व; कौन होंगे CEO पद के दावेदार ?

भारत दुनिया का छठा-सबसे बड़ा पेटेंट फ़ाइलर बना, नवाचार शक्ति में बड़ी छलांग

ओडिशा : पुरी और सुनापुर बीच को फिर मिला ब्लू फ्लैग सम्मान

Exit mobile version