जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों के साथ पिछले नौ दिनों से जारी मुठभेड़ में भारतीय सेना को बड़ा नुकसान हुआ है। शुक्रवार (8 अगस्त)रात हुई गोलीबारी में सेना के दो जवान शहीद हो गए, जबकि दो अन्य घायल हुए। यह घाटी में हाल के वर्षों का सबसे लंबा आतंकवाद विरोधी अभियान माना जा रहा है।
सेना ने शनिवार (9 अगस्त) को पुष्टि की कि शहीदों में लेफ्टिनेंट कर्नल प्रितपाल सिंह और सिपाही हरमिंदर सिंह शामिल हैं। चिनार कोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “राष्ट्र के लिए कर्तव्य निभाते हुए वीरों के सर्वोच्च बलिदान का हम सम्मान करते हैं। उनका साहस और समर्पण हमें सदैव प्रेरित करता रहेगा। सेना गहरी संवेदना व्यक्त करती है और शोक संतप्त परिवारों के साथ एकजुटता से खड़ी है।”
यह मुठभेड़ 1 अगस्त को शुरू हुई थी, जब आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने पर सुरक्षा बलों ने दक्षिण कश्मीर के अखल क्षेत्र के घने जंगलों में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। शुरुआती दिन दोनों ओर से हुई गोलीबारी के बाद रात में ऑपरेशन रोका गया, लेकिन घेरा कड़ा कर अतिरिक्त बल तैनात किए गए। अब तक एक आतंकी मारा जा चुका है, जबकि बाकी की तलाश जारी है।
जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने बताया कि मुठभेड़ लंबे समय तक खिंचने की वजह दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और घना जंगल है। उन्होंने कहा, “समय लग रहा है, लेकिन हम उन्हें पकड़ लेंगे।” इस बीच, पुलिस और सेना के शीर्ष अधिकारी लगातार मौके पर जाकर अभियान की प्रगति की निगरानी कर रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इलाके में आतंकियों की गतिविधियां सीमित करने और किसी भी तरह की घुसपैठ रोकने के लिए घेराबंदी और तलाशी अभियान पूरे जोर-शोर से जारी है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बल चौकसी बढ़ाए हुए हैं और आसपास के गांवों में भी सघन तलाशी चल रही है।
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