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Friday, October 30, 2026
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अलास्का में पुतिन-ट्रंप शिखर सम्मेलन: क्या थमेगा यूक्रेन युद्ध या बढ़ेगी कूटनीतिक खींचतान?

पुतिन-जेलेंस्की मुलाकात केवल तभी होगी जब वार्ता अपने अंतिम चरण में पहुंचे...

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रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर आमने-सामने बैठने वाले हैं। तीन साल से अधिक समय से जारी इस संघर्ष को खत्म करने के प्रयास में दोनों नेता अगले शुक्रवार (15 अगस्त) अलास्का में मुलाकात करेंगे। ट्रंप ने इसकी घोषणा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर की, जबकि क्रेमलिन ने भी इसकी पुष्टि कर इसे तार्किक कदम बताया।

ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया था कि रूस और यूक्रेन के बीच कुछ क्षेत्रों की अदला-बदली संभव है, ताकि दोनों देशों के लिए बेहतरी के हालात बन सकें। हालांकि, उन्होंने इस पर अधिक जानकारी नहीं दी। व्हाइट हाउस में शुक्रवार(8 अगस्त) को ट्रंप ने कहा, “मैं युद्ध में हो रही हत्याओं को रोकने के लिए जो भी कर सकता हूं, करूंगा।”

अलास्का वह अमेरिकी राज्य है जिसे रूस ने 1867 में अमेरिका को बेच दिया था। इसका पश्चिमी तट रूस के सबसे पूर्वी हिस्से से ज्यादा दूर नहीं है। क्रेमलिन के वरिष्ठ सहयोगी यूरी उशाकोव ने बताया कि अलास्का और आर्कटिक ऐसे क्षेत्र हैं जहां दोनों देशों के आर्थिक हित टकराने के बजाय मेल खाते हैं, और यहां बड़े पैमाने पर पारस्परिक लाभ वाले प्रोजेक्ट संभव हैं। उन्होंने कहा कि पुतिन-ट्रंप वार्ता का मुख्य फोकस यूक्रेनी संकट का दीर्घकालिक शांतिपूर्ण समाधान होगा।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की इस बैठक को तीन-तरफा बनाने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि पुतिन से सीधी मुलाकात ही शांति की दिशा में असली प्रगति ला सकती है। हालांकि, रूसी पक्ष ने अभी उनके साथ बैठक से इनकार कर दिया है। ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकोफ ने इस सप्ताह पुतिन से बातचीत के दौरान त्रिपक्षीय बैठक का प्रस्ताव रखा था, लेकिन क्रेमलिन का कहना है कि पुतिन-जेलेंस्की मुलाकात केवल तभी होगी जब वार्ता अपने अंतिम चरण में पहुंचे और शांति की शर्तों पर सहमति बन जाए।

ट्रंप और पुतिन पिछली बार 2019 में जापान में G20 शिखर सम्मेलन में आमने-सामने मिले थे। उसके बाद से कई बार टेलीफोन पर बातचीत हुई, लेकिन यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में ठोस प्रगति नहीं हो सकी। रूस ने हालिया वार्ता में स्पष्ट किया है कि युद्धविराम तभी संभव है जब यूक्रेन चार विवादित क्षेत्रों से सेना हटाए, नाटो में शामिल न होने का वादा करे और पश्चिमी सैन्य सहयोग से दूरी बनाए।

दूसरी ओर, कीव ने साफ कहा है कि वह रूस के कब्जे वाले अपने क्षेत्रों को मान्यता नहीं देगा और युद्धविराम के लिए सुरक्षा गारंटी चाहता है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की तैनाती भी शामिल हो सकती है। अब सभी निगाहें अगले शुक्रवार (15 अगस्त) होने वाले अलास्का सम्मेलन पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि यह मुलाकात इतिहास में शांति का मोड़ बनेगी या कूटनीति के पन्नों में एक और अधूरी कोशिश के रूप में दर्ज होगी।

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