राष्ट्रीय जांच एजेंसी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साजिश के मामले में 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार कर 11 दिन की हिरासत में लिया है। 16 मार्च 2026 को पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष NIA अदालत ने आरोपियों को 27 मार्च तक एजेंसी की कस्टडी में भेजने का आदेश दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने कहा, “सबूत इकट्ठा करना, क्रिमिनल साज़िश का पता लगाना, साथ में आरोपी लोगों की पहचान करना और आरोपी लोगों के मोबाइल डेटा का एनालिसिस करना, ये सब ऐसे पहलू हैं कि आरोपी लोगों की पुलिस कस्टडी सही है।”
विद्रोहियों को म्यांमार में ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई:
NIA के अनुसार, सभी आरोपी वैध वीजा पर भारत आए थे, लेकिन बिना अनिवार्य परमिट के मिजोरम पहुंचे और वहां से म्यांमार में प्रवेश किया। जांच में सामने आया है कि ये विदेशी नागरिक म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों के संपर्क में आए और उन्हें ट्रेनिंग देने लगे। एजेंसी ने यह भी दावा किया कि ये आरोपी यूरोप से बड़ी मात्रा में ड्रोन भारत लाए थे, जिन्हें कथित रूप से उग्रवादी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाना था। NIA के मुताबिक, इन समूहों के भारत में सक्रिय विद्रोही संगठनों से भी संबंध हैं।
UAPA के तहत मामला दर्ज:
आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 18 के तहत आपराधिक साजिश और आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने का मामला दर्ज किया गया है। एजेंसी अब आरोपियों के मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच कर रही है, ताकि उनके अन्य सहयोगियों और विदेशी हैंडलर्स का पता लगाया जा सके।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल:
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब म्यांमार और पूर्वोत्तर भारत के सीमावर्ती इलाकों में विदेशी हस्तक्षेप को लेकर पहले भी चिंता जताई जा चुकी है। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने 2025 में विधानसभा में कहा था कि बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक मिजोरम के रास्ते म्यांमार में प्रवेश कर रहे हैं और वहां उग्रवादियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। उन्होंने बताया था कि जून से दिसंबर 2024 के बीच 2,000 से अधिक विदेशी आइजोल आए, लेकिन वे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए, जिससे संदेह और गहरा हुआ।
इस पूरे घटनाक्रम ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। केंद्र सरकार ने पहले ही नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम में ‘प्रोटेक्टेड एरिया रेजीम’ (PAR) को फिर से लागू किया है, ताकि विदेशी नागरिकों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जा सके। फिलहाल NIA इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के पीछे कौन से बड़े संगठन या ताकतें सक्रिय हैं।
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