तेंगनौपाल में 15 एकड़ अवैध अफीम की खेती नष्ट; मणिपुर में ‘वार ऑन ड्रग्स’ तेज़

यह कार्रवाई कई 11 से 15 नवंबर के बीच चले अभियानों के बाद हुई है। इन संयुक्त ऑपरेशनों में असम राइफल्स, सीआरपीएफ, मणिपुर पुलिस और अन्य एजेंसियों ने मिलकर 530 एकड़ से अधिक पोपी खेतों को नष्ट किया था।

तेंगनौपाल में 15 एकड़ अवैध अफीम की खेती नष्ट; मणिपुर में ‘वार ऑन ड्रग्स’ तेज़

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मणिपुर में सुरक्षा बलों का ‘वार ऑन ड्रग्स’ अभियान लगातार तीव्र होता जा रहा है। सोमवार (17 नवंबर) को तेंगनौपाल ज़िले में एक संयुक्त अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने लगभग 15 एकड़ अवैध पोपी (अफीम) की खेती को पूरी तरह नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई तेंगनौपाल थाना क्षेत्र के खुदेई खुलेन हिल रेंज में हुई, जहां दिनभर चले ऑपरेशन में टीमों ने खेती को पहचानकर उखाड़ दिया।

कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों ने खेतों में बने एक अस्थायी झोपड़े को भी ध्वस्त किया, सिंचाई के लिए स्थापित अस्थायी पाइपलाइन को हटाया और मौके से तीन केमिकल स्प्रे पंप नष्ट किए। अधिकारियों के अनुसार, दोबारा बुवाई रोकने और खेती से जुड़े लोगों की पहचान करने के लिए इलाके में सख्त निगरानी जारी है।

यह कार्रवाई कई 11 से 15 नवंबर के बीच चले अभियानों के बाद हुई है। इन संयुक्त ऑपरेशनों में असम राइफल्स, सीआरपीएफ, मणिपुर पुलिस और अन्य एजेंसियों ने मिलकर 530 एकड़ से अधिक पोपी खेतों को नष्ट किया था। सबसे बड़ा चरण उखरूल ज़िले में चला, जहां सोमदाल, लामलाई चिंगफेई और लितान हिल रेंज में लगभग 436 एकड़ पोपी को साफ कर दिया गया। साथ ही 51 अस्थायी झोपड़ियों को जला दिया गया, जिन्हें खेती के दौरान रहने और भंडारण के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

कांगपोकपी ज़िले के लोइबोल खुलेन गांव में लगभग 20 एकड़ पोपी को नष्ट किया गया और दो बोरे नमक समेत कई कृषि उपकरण, पाइप, स्प्रे पंप व खरपतवारनाशक नष्ट किए गए। कोटलन गांव में एक अन्य ऑपरेशन में 20 एकड़ और खेती साफ की गई। यहां से पाँच झोपड़ियाँ, उर्वरक के बोरे, नमक के पैकेट और रसायन बरामद किए गए। 12 नवंबर को थोंगलांग अकुत्पा–सोंगजांग और औलमुन गांव के बीच पहाड़ी इलाकों में 56 एकड़ पोपी को उखाड़ा गया था और 19 झोपड़ियों को हटाया गया।

पुलिस के अनुसार, कांगपोकपी, उखरूल और सेनापति में इन संयुक्त कार्रवाइयों के दौरान 486 एकड़ अवैध खेती नष्ट की गई। अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि इन खेतों से 3,300 किलो से अधिक अफीम का उत्पादन संभव था, जिसकी कीमत कई करोड़ रुपये होती। कुल मिलाकर 60 झोपड़ियाँ, भारी मात्रा में उर्वरक, नमक, रसायन और खेती के औज़ार नष्ट किए गए। सुरक्षा बलों ने कठिन पहाड़ी रास्तों और खराब मौसम के बावजूद कार्रवाई जारी रखी।

असम राइफल्स के एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि सभी एजेंसियाँ नशे की खेती और इससे प्रभावित अर्थव्यवस्था को खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। ये अभियान राज्य में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन एवं वितरण को रोकने के लिए चलाए जा रहे सरकारी “War against Drugs” कार्यक्रम का हिस्सा हैं। 2020 से अब तक सुरक्षा बल 8,000 एकड़ से अधिक पोपी क्षेत्रों की पहचान कर चुके हैं, जिनमें से 1,700 एकड़ उसी वर्ष नष्ट किए गए थे। कड़ी कार्रवाई के चलते पोपी की खेती में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।

अधिकारियों के अनुसार, पोपी की अवैध खेती लंबे समय से हिंसा, उग्रवादी गतिविधियों के फंडिंग और मणिपुर की जातीय तनावों से जुड़ी रही है। नशे से होने वाली कमाई अक्सर उन समूहों के हाथों में जाती है जो पहाड़ी इलाकों में अस्थिरता का कारण बनते हैं। सुरक्षा बलों का कहना है कि इन खेतों को लगातार नष्ट करके वे न केवल अवैध नेटवर्क की वित्तीय रीढ़ तोड़ रहे हैं, बल्कि पहाड़ी जिलों में शांति और स्थिरता लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

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