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ऑपरेशन कगार: आत्मसमर्पित माओवादी कमांडर ने सौंपी डायरी, बताया मारे गए या घर लौटे कई कैडर

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तेलंगाना पुलिस के समक्ष हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले CPI(माओवादी) के एक वरिष्ठ कमांडर ने खुलासा किया है कि चल रहे ऑपरेशन कगार के दौरान संगठन को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के वरिष्ठ कमांडर बडसे सुक्का उर्फ देवा उर्फ दर्शन ने कहा कि इस अभियान के चलते कई माओवादी कैडर मारे गए हैं, कई ने आत्मसमर्पण किया है और कुछ ने संगठन छोड़कर अपने घरों की राह पकड़ ली है।

ऑपरेशन कगार एक व्यापक नक्सल विरोधी सुरक्षा अभियान है, जो दक्षिण बस्तर के जंगलों और उससे सटे तेलंगाना के सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय CPI (माओवादी) के नेटवर्क और सशस्त्र दस्तों को निशाना बना रहा है। इस अभियान के तहत केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई लगातार तेज की गई है।

एक विशेष बातचीत में देवा ने बताया कि उसे हथियारों के साथ एक बोलेरो वाहन में यात्रा के दौरान पुलिस चेकिंग में पकड़ा गया था। उसने यह भी कहा कि उसने जांच एजेंसियों को अपनी एक डायरी सौंपी है, जिसमें संगठन द्वारा छिपाकर रखे गए हथियारों और उनके भंडारण से जुड़ी जानकारी दर्ज है। सुरक्षा एजेंसियां इस जानकारी को माओवादी नेटवर्क के खिलाफ अहम मान रही हैं।

49 वर्षीय देवा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा थाना क्षेत्र अंतर्गत पुव्वर्थी गांव का निवासी है। वह CPI (माओवादी) संगठन के भीतर PLGA बटालियन कमांडर के रूप में कार्यरत था और उसका रैंक DK SZCM बताया गया है। संगठन के भीतर उसे एक प्रभावशाली आदिवासी नेता माना जाता था।

देवा ने वर्ष 2003 में वरिष्ठ माओवादी नेता माडवी हिड़मा से प्रभावित होकर सीपीआई (माओवादी) का दामन थामा था। इसके बाद के वर्षों में उसने सैन्य रणनीति, विस्फोटकों की खरीद, आग्नेयास्त्रों के निर्माण और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज (IED) तैयार करने में विशेषज्ञता हासिल की। नवंबर 2023 में हिड़मा के प्रमोशन के बाद देवा को PLGA बटालियन कमांडर नियुक्त किया गया था।

वर्ष 2024 में दक्षिण बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों के तेज होने के बीच बडसे सुक्का ने माओवादी ढांचे के पुनर्गठन में भी भूमिका निभाई। बाद में उसे KGH क्षेत्र में सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

देवा की गिरफ्तारी या जानकारी देने पर तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र पुलिस के साथ-साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कुल मिलाकर 75 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। उसके आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों द्वारा ऑपरेशन कगार के तहत हासिल की गई एक बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।

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