पाक-आईएसआई समर्थित टेरर मॉड्यूल और अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी में शामिल शाहबाज अंसारी गिरोह दो और सदस्यों को क्राइम ब्रांच की टीम ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सीलमपुर के महफूज अली उर्फ बाबी उर्फ कबूतर और जौनपुर के मोहम्मद अहमद के रूप में हुई है। इनके कब्जे से एक सब-मशीन गन, तीन पिस्टल और 82 कारतूस बरामद हुए हैं। इस गिरोह पर पहले ही यूएपीए एक्ट की धाराएं लगाई जा चुकी हैं और इस माड्यूल के 16 आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनके कब्जे से विदेश में बनी 28 आधुनिक पिस्टल और 281 कारतूस बरामद हुए थे।
क्राइम ब्रांच के विशेष पुलिस आयुक्त एचजीएस धालीवाल के मुताबिक, दोनों आरोपितों को गुप्त सूचना के आधार पर एसीपी संजय कुमार नागपाल की देखरेख और इंस्पेक्टर मान सिंह और इंस्पेक्टर सुंदर गौतम के नेतृत्व में गठित टीम ने गिरफ्तार किया।
महफूज ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की और 1998 में स्कूल छोड़ा
पूछताछ में पता चला कि महफूज ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की और 1998 में स्कूल छोड़ने के बाद, उसने अपने चाचा की ताला बनाने की फैक्ट्री में और बाद में अपने पिता की फैक्ट्री में काम किया। धीरे-धीरे वह अपराध की दुनिया में आया और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सक्रिय कुख्यात अपराधियों और संगठित गिरोहों के साथ जुड़ गया।
2006 में उसे पहली बार गिरोहों की आपसी दुश्मनी के कारण हुई गोलीबारी की घटना के बाद हत्या की कोशिश के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वह उत्तर-पूर्वी दिल्ली में बदले की भावना से की गई कई गैंगवार में शामिल हिंसक आपराधिक समूहों का सक्रिय सदस्य बन गया। वह कई हत्याओं में शामिल रहा है, जिनमें साबिर अली उर्फ नन्हे, इरशाद, अकील मामा, जाहिद और हाल ही में नदीम उर्फ चाचा फाडू की हत्या शामिल है।
वह शमीम बर्फ वाला, साबिर चौधरी, हाशिम बाबा, राशिद केबल, दानिश, अनवर उर्फ मोगली, नासिर उर्फ चिववाला और अन्य जैसे कुख्यात अपराधियों के साथ जुड़ा हुआ है। 2019 में मकोका के एक मामले में उसका नाम सामने आया, जिसके बाद वह काफी समय तक फरार रहा।
सिद्धू मूसेवाला की हत्या में रहा है शामिल
महफूज जेल में बंद गैंग्सटर हाशिम बाबा के साथ करीबी संबंध था और वह उसकी आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से मदद करता था। 2021 में हाशिम बाबा के कहने पर उसने उन शूटर्स को पंजाब पहुंचाने में मदद की, जिन्होंने बाद में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या की। वारदात के बाद उसने उनके मोबाइल फोन और इंटरनेट डोंगल भी इकट्ठा किए और फिर दिल्ली में यमुना नदी में फेंककर इलेक्ट्रानिक सबूत नष्ट कर दिए।
इसके बाद 2022 में, हाशिम बाबा के कहने पर और राशिद केबल के साथ मिलकर उसने सलीम अहमद उर्फ सलीम पिस्टल से कई आधुनिक विदेशी पिस्टल लीं और उन्हें पंजाब से आए गैंग्सटर जग्गू भगवानपुरिया के साथियों तक पहुंचाया। उसने बताया कि ये हथियार जग्गू भगवानपुरिया सिंडिकेट के सदस्यों के इस्तेमाल के लिए सप्लाई किए गए थे, जिससे वह संगठित आपराधिक गिरोहों को आधुनिक अवैध हथियार सप्लाई करने की चेन में एक अहम कड़ी बन गया।
सलीम पिस्टल के साथ हथियार तस्करी में रहा है शामिल
महफूज सलीम पिस्टल के नेतृत्व वाले एक अंतरराष्ट्रीय अवैध हथियार तस्करी गिरोह का सक्रिय सदस्य है, जिसमें भगोड़े गैंग्सटर शाहबाज अंसारी और रेहान अंसारी भी शामिल हैं। यह गिरोह पाकिस्तान से आधुनिक विदेशी हथियार मंगवाता था; इसके लिए हथियारों के पुर्जों को खास तौर पर बनाई गई वेल्डिंग मशीनों और गियरबाक्स के अंदर छिपाकर एयर कार्गो के जरिए काठमांडू (नेपाल) भेजा जाता था।
नेपाल पहुंचने के बाद, इन खेपों की भारत में तस्करी की जाती थी और गिरोह के सदस्यों के जरिए इन्हें आगे पहुंचाया जाता था। उसने स्वीकार किया कि वह ये खेपें लेता था, हथियारों के पुर्जों को जोड़कर उन्हें पूरी तरह काम करने लायक हथियार बनाता था, उन्हें दिल्ली में सुरक्षित जगहों पर रखता था और फिर सलीम पिस्टल के निर्देश पर संगठित आपराधिक गिरोहों और अन्य लोगों को सप्लाई करता था। 2023 में सलीम पिस्टल के दुबई जाने के बाद भी वह भारत में उसके मुख्य सहयोगियों में से एक के तौर पर काम करता रहा।
गैंग्सटरों को हथियार पहुंचाता था अहमद
वहीं गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद अहमद ने 10वीं तक पढ़ाई की और 2010 में पढ़ाई छोड़ने के बाद मोबाइल व कंप्यूटर की दुकानों पर काम किया। जौनपुर लौटने के बाद वह आपराधिक तत्वों के संपर्क में आया। वर्ष 2013 में अवैध हथियार तस्कर अमित यादव से जुड़ा और आजमगढ़ गोलीकांड में गिरफ्तार होकर जेल गया।
रिहाई के बाद उस पर अच्छू खान हत्याकांड में शामिल होने का आरोप लगा। वर्ष 2015 में शाहगंज के हाफिज के माध्यम से प्रतापगढ़ के नाहिद उर्फ हजरत अली और समीर के जरिए बिहार के मुंगेर से कट्टे लाकर उत्तर प्रदेश में सप्लाई करने लगा। 2020 में वह दिल्ली के वसीम मलिक के संपर्क में आया, जिसने विदेशी हथियार उपलब्ध कराए। 2025 में जेल से छूटने के बाद उसने वसीम और मोहम्मद राहिल के साथ तस्करी फिर शुरू की।
पिछले एक वर्ष में उसने 15 से 20 विदेशी पिस्टल और 50 से 60 कारतूस अपराधियों तक पहुंचाए। प्रत्येक हथियार पर 10 हजार से 15 हजार कमीशन लेकर शेष रकम राहिल को भेजता था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क से मिली रकम का इस्तेमाल भारत में आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाना था।
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