प्लेनेट मराठी के मालिक अक्षय बर्दापुरकर पर ₹85 लाख की धोखाधड़ी का केस दर्ज!

पूर्व साझेदार ने लगाए गंभीर आरोप

प्लेनेट मराठी के मालिक अक्षय बर्दापुरकर पर ₹85 लाख की धोखाधड़ी का केस दर्ज!

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मुंबई पुलिस ने मराठी एंटरटेनमेंट कंपनी प्लेनेट मराठी के मालिक अक्षय बर्दापुरकर और उनके सहयोगियों मीनाली दीक्षित, धवल शाह, डोडा आहिरे सहित अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। यह शिकायत कंपनी की पूर्व साझेदार सौम्या अनिरुद्धा विलकर (52) ने दर्ज कराई है। आरोप है कि बर्डापुरकर और उनके सहयोगियों ने मिलकर ₹85 लाख की धोखाधड़ी की।

एफआईआर के अनुसार, विलकर जो एक फिल्म और टीवी प्रोड्यूसर हैं, पहले प्लेनेट मराठी की सहमालिक थीं। उनका आरोप है कि फर्जी डीड ऑफ़ एडमिशन कम रिटायरमेंट तैयार कर उन्हें साझेदारी से बाहर दिखाया गया। इन्हीं दस्तावेज़ों का इस्तेमाल कर एक्सिस बैंक और डॉयचे बैंक से लगभग ₹85 लाख के लोन उनकी जानकारी और सहमति के बिना उठाए गए।

विलकर ने बताया कि वे 2017 में प्लेनेट मराठी से जुड़ी थीं, जब यह कंपनी केवल यूट्यूब चैनल पर वीडियो बनाती थी। 2017 से 2019 के बीच उन्होंने कंपनी में निवेश किया और आधिकारिक पार्टनर बनीं। अप्रैल 2019 में दोनों ने मिलकर कंपनी का ऑफिस मुलुंड में शुरू किया और ‘एबी आणि सीडी’, ‘गोष्ट एका पाटलाची’ जैसी फिल्में बनाई।

कोरोना महामारी के दौरान कामकाज रुका, लेकिन 20 जुलाई 2020 को ‘प्लेनेट मराठी सेलर सर्विसेज लिमिटेड’ नाम से नई कंपनी बनाई गई, जिसमें विलकर और उनके बेटे अनित्य डायरेक्टर बने, जबकि बर्दापुरकर संस्थापक रहे। कंपनी ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कदम रखा और वेब सीरीज़ बनाने लगी। इस दौरान मीनाली दीक्षित बतौर टैलेंट मैनेजर काम करती थीं।

शिकायत में दावा है कि जैसे-जैसे कंपनी का विस्तार हुआ, आंतरिक विवाद बढ़ते गए। बर्दापुरकर पर आरोप है कि वे कॉन्टेंट डील्स में दखल देने लगे और खर्च बढ़ाने लगे, जिससे कंपनी की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। कारोबार संभालने के लिए लगभग ₹60 लाख का लोन नए वेंचर के लिए और ₹50 लाख प्लेनेट मराठी के लिए लिया गया।

विलकर ने आरोप लगाया कि बर्दापुरकर ने न सिर्फ बैंकों से लोन लिए बल्कि निवेशकों से भी पैसे उधार लिए, जिन्हें कंपनी में लगाने के बजाय निजी उपयोग में खर्च किया गया। इसके अलावा सभी बैंकिंग ऑपरेशंस पर अकेले बर्दापुरकर का नियंत्रण था। मुंबई पुलिस ने अब मामले की जांच शुरू कर दी है। यह केस मराठी फिल्म इंडस्ट्री और ओटीटी बिजनेस से जुड़े एक बड़े वित्तीय विवाद के रूप में देखा जा रहा है।

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