राजस्थान में हाल ही में लागू किए गए राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025 के तहत पुलिस ने पहली बार दो ईसाई मिशनरियों पर मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई (20 नवंबर)गुरुवार को की गई, जब कोटा में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान धोखे और प्रलोभन के जरिए कथित धर्मांतरण के आरोप सामने आए।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की पहचान चांडी वर्गीज़ और अरुण जॉन के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने 6 से 9 नवंबर के बीच कोटा स्थित बियरशेबा चर्च में आयोजित 3-दिवसीय ‘स्पिरिचुअल सत्संग’ के दौरान लोगों को बहलाकर धर्म परिवर्तन कराया।
बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों की शिकायत पर पुलिस ने दोनों मिशनरियों के खिलाफ FIR दर्ज की।
दोनों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299—धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे के तहत भी बुक किया गया है। साथ ही, उन्हें धर्मांतरण-विरोधी कानून की धारा 3 और 5 के तहत भी आरोपी बनाया गया है, जो धोखाधड़ी, दबाव, प्रलोभन या कुटिल साधनों से धर्मांतरण को दंडनीय अपराध घोषित करता है।
शिकायत के अनुसार, चांडी वर्गीज़ और अरुण जॉन ने कार्यक्रम के दौरान न केवल हिंदू समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं, बल्कि भाजपा सरकार को “डैविल्स किंगडम” (शैतान का राज्य) कहकर बदनाम किया।
पुलिस का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियाँ साम्प्रदायिक तनाव पैदा कर सकती हैं, इसलिए इन्हें FIR का हिस्सा बनाया गया है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कार्यक्रम के दौरान बनाए गए सोशल मीडिया फुटेज का परीक्षण कर रही।
प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने लोगों को कथित तौर पर धर्मांतरण के लिए प्रभावित किया गया। अधिकारियों ने दोनों आरोपियों को 3 दिनों में जवाब देने का नोटिस भेजा है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान विधानसभा ने सितंबर 2025 में यह कठोर धर्मांतरण-विरोधी कानून पास किया था, जिसमें धोखाधड़ी से किए गए धर्म परिवर्तन पर भारी जुर्माना और सख्त सजा का प्रावधान है। यह मामला कानून लागू होने के बाद की पहली बड़ी कार्रवाई है, जिसने प्रदेश में गैर-कानूनी धर्मांतरण गतिविधियों पर निगरानी को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
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