लद्दाख में शांति पूर्ण हड़ताल के दौरान हुई हिंसा में चार लोगों की मौत और 70 से अधिक घायल होने के दो दिन बाद सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया। वांगचुक पर आरोप है कि उन्होंने उन प्रदर्शनकारियों को उकसाया, जो लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और उसे संविधान की छठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे थे।
हिंसक घटनाओं के बाद लेह में कर्फ्यू लागू किया गया था। वांगचुक ने अपने दो सप्ताह के भूख हड़ताल को भी समाप्त किया, जिसमें वह लद्दाख को छठवीं अनुसूची में शामिल करने और राज्य बनाने की मांग कर रहे थे। सरकार ने वांगचुक पर प्रदर्शनकारियों को उकसाने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी प्रोवोकेटिव बयानबाज़ी और राजनीतिक रूप से प्रेरित समूहों की गतिविधियों ने हिंसा को भड़काया।
वांगचुक ने लेह एपीक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के साथ मिलकर प्रदर्शन किया था। उनका उद्देश्य लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना और भारतीय संविधान की छठवीं अनुसूची में शामिल करना था। उन्होंने 10 सितंबर 2025 को भूख हड़ताल शुरू की थी, जो 15 दिनों तक चली और 24 सितंबर को बढ़ती हिंसा को देखते हुए समाप्त की गई।
हड़ताल और प्रदर्शन के दौरान वांगचुक के भाषणों में अरब स्प्रिंग शैली की विरोध-प्रदर्शनी और नेपाल में जनरेशन ज़ेड के प्रदर्शन के संदर्भ शामिल थे, जिनसे हिंसा भड़कने का आरोप लगाया गया। गृह मंत्रालय ने बुधवार (26 सितंबर)को एक बयान में कहा कि सरकार पहले ही लेह एपीक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के साथ इस मुद्दे पर बातचीत कर रही थी। कई औपचारिक और अनौपचारिक बैठकों के जरिए समाधान खोजने का प्रयास किया गया था। सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी ने लद्दाख में राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है और केंद्र और स्थानीय नेताओं के बीच विवाद की स्थितियां पैदा कर दी हैं।
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