स्वयंघोषित धर्मगुरु स्वामी चैतन्यनंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी पर गंभीर आरोप लगे हैं। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ 17 महिला छात्राओं ने यौन उत्पीड़न की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया है। यह शिकायत 4 अगस्त को वसंत कुंज नॉर्थ थाने में दर्ज कराई गई थी। पुलिस के अनुसार, स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट की मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य हैं। इसी संस्थान में पीजीडीएम (पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट) की पढ़ाई कर रहीं 32 छात्राओं के बयान दर्ज किए गए, जिनमें से 17 ने आरोप लगाया कि स्वामी ने गाली-गलौज की, अश्लील संदेश भेजे और शारीरिक छेड़छाड़ की कोशिश की।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। 16 छात्राओं ने बाद में मजिस्ट्रेट के सामने भी अपना बयान दर्ज कराया।
फर्जी डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट वाली कार जब्त
पुलिस जांच में संस्थान के बेसमेंट से एक वॉल्वो कार मिली, जिस पर नकली डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट 39 UN 1 लगी थी। पुलिस का दावा है कि यह कार स्वामी सरस्वती इस्तेमाल करते थे। इस मामले में 25 अगस्त को एक और FIR दर्ज की गई और कार जब्त कर ली गई।
यह कोई पहला मामला नहीं है। 2009 में दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी थाने में उन पर धोखाधड़ी और छेड़छाड़ का केस दर्ज हुआ था। 2016 में भी एक महिला ने उनके खिलाफ वसंत कुंज नॉर्थ थाने में छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई थी।
फिलहाल फरार
पुलिस का कहना है कि सरस्वती इस समय फरार हैं और उन्हें पकड़ने के लिए मैनहंट चलाया जा रहा है। यह मामला न सिर्फ स्वयंघोषित धर्मगुरु स्वामी चैतन्यनंद सरस्वती की कथित करतूतों को उजागर करता है बल्कि शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। क्या आप चाहेंगे कि मैं इस खबर को एक टाइमलाइन फॉर्मेट में भी तैयार कर दूँ, ताकि 2009 से लेकर अब तक उनके खिलाफ दर्ज सभी मामलों की क्रमवार झलक साफ़ मिल सके।
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