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तमिलनाडु ऑर्गन ट्रैफिकिंग केस: सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच से किया इनकार, हाईकोर्ट की SIT को दी मंजूरी!

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तमिलनाडु में कथित अंग तस्करी और अवैध ट्रांसप्लांट के मामलों की जांच अब स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ही करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (10 अक्टूबर) को CBI जांच की मांग खारिज करते हुए मद्रास हाईकोर्ट द्वारा गठित SIT को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा गठित टीम में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा बनाई गई SIT जांच के लिए पर्याप्त है और उसके गठन में कोई त्रुटि नहीं दिखती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके इस आदेश का अन्य अधिकारियों के कामकाज या जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार SIT के गठन का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि उसके संघटन पर आपत्ति है। उनका कहना था कि चुने गए अधिकारी अलग-अलग जिलों से हैं और उन्हें जांच के लिए 200–300 किलोमीटर तक यात्रा करनी पड़ती है, जिससे दिक्कत होती है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखा सवाल किया,“मुद्दा खुद कितना गंभीर है, यह आपको परेशान नहीं कर रहा?” जब लूथरा ने कहा कि राज्य केवल लॉजिस्टिक दिक्कतें बता रहा है, तो बेंच ने कहा, “याचिकाकर्ता ने SIT या CBI जांच की मांग की थी। अदालत ने SIT का विकल्प चुना, जो आपके ही पक्ष में है। अब इसके गठन में बदलाव की जरूरत नहीं है।”

तमिलनाडु सरकार ने हाईकोर्ट की उस टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई थी जिसमें कहा गया था कि अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) SIT के लिए अधिकारियों के नाम बताने में “अनिच्छुक” दिखे। लूथरा ने दलील दी कि AAG ने केवल समय मांगा था और हाईकोर्ट की टिप्पणी अनुचित थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को भी खारिज करते हुए कहा, “हम इस मामले में कोई दखल नहीं देंगे… अगर हम कुछ कहेंगे, तो बात और बढ़ेगी।”

अदालत ने साफ किया कि इस चरण में जांच SIT के पास ही रहेगी। बीजेपी नेता के. अन्नामलाई ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि यह DMK सरकार के लिए शर्मनाक दिन है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार SIT की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण चाहती थी और अपनी पसंद के अधिकारियों को शामिल करवाने की कोशिश कर रही थी।

अन्नामलाई ने यह भी याद दिलाया कि हाल के महीनों में अदालतों ने DMK सरकार के कामकाज पर कई बार सवाल उठाए हैं। BSP नेता थिरु आर्मस्ट्रांग AVL हत्या मामला, जिसे CBI को ट्रांसफर करने पर सरकार रोक नहीं पाई। करूर स्टांपेड केस, जिसमें TVK रैली के दौरान अफरा-तफरी में कई लोगों की मौत हुई। थिरुपरंगुंद्रम पशु बलि मामला, जिसमें अदालत ने बलि पर रोक लगाते हुए पहाड़ी के नामकरण को औपचारिक रूप दिया।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद तमिलनाडु में ऑर्गन ट्रैफिकिंग से जुड़े मामलों की जांच अब पूरी तरह SIT के हाथों में रहेगी। अदालत ने साफ कर दिया है कि फिलहाल CBI की भूमिका की कोई आवश्यकता नहीं है और हाईकोर्ट द्वारा गठित टीम अपनी जांच स्वतंत्र रूप से जारी रखेगी।

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