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Wednesday, February 25, 2026
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वसई-विरार भूमि घोटाला:  पूर्व आयुक्त सहित चार गिरफ्तार!

41 अवैध इमारतों का मामला

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वसई-विरार भूमि घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वसई विरार सिटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (VVCMC) के पूर्व आयुक्त अनिल पवार, टाउन प्लानिंग के उप-निदेशक वाई.एस. रेड्डी, बहुजन विकास आघाडी (BVA) के पूर्व पार्षद सीताराम गुप्ता और उनके भतीजे अरुण गुप्ता को गिरफ्तार किया है। गुरुवार (14 अगस्त) को पीएमएलए (PMLA) की विशेष अदालत ने चारों को 20 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।

ईडी के मुताबिक VVCMC के कुछ अधिकारियों, स्थानीय बिल्डरों और बिचौलियों का एक संगठित कार्टेल मौजूद था, जो तय कमीशन लेकर अवैध निर्माण पर आंख मूंदे बैठा रहता था। आरोप है कि अनिल पवार ने इस नेटवर्क को और मजबूत किया, जहां 150 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से कमीशन तय था, जिसमें से 50 रुपये प्रति वर्ग फुट पवार को जाते थे और बाकी रकम अन्य लोगों में बांटी जाती थी।

पवार पर आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी, बेटी और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर कई फर्में बनाई, जो आवासीय प्रोजेक्ट्स के निर्माण में लगी थीं। ईडी का दावा है कि रेड्डी के जरिए पवार ने नकद में महंगे साड़ी, मोती, सोना और हीरे-जवाहरात खरीदे। मई और जून में हुई छापेमारी में रेड्डी के ठिकानों से 8.23 करोड़ रुपये नकद और 23.25 करोड़ रुपये की हीरे की ज्वेलरी बरामद हुई।

ईडी ने बताया कि सीताराम और अरुण गुप्ता ने 2013 से 2021 के बीच बिना अनुमति 41 इमारतें खड़ी कीं। उन्होंने निजी मालिकों से 30 एकड़ जमीन और सरकारी परियोजनाओं के लिए आरक्षित अतिरिक्त 30 एकड़ जमीन (जिसमें डंपिंग ग्राउंड और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की भूमि शामिल थी) फर्जी दस्तावेजों के जरिए बिल्डरों को बेच दी।

यह भी सामने आया कि 2007 में दोनों ने अतिक्रमण कर चॉलें बनाई थीं, जिन्हें शिकायत के बाद 2007-08 में तोड़ा गया। 2009-11 में VVCMC के गठन के बाद लगभग 60 एकड़ जमीन पर 168 इमारतें और 74 चॉलें बनाई गईं, जिनमें से 30 एकड़ सरकारी भूमि पर थीं। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर इन्हें भी गिरा दिया गया, लेकिन बाद में 2013-21 के बीच उसी भूमि पर फिर 41 इमारतें खड़ी की गईं।

ईडी ने खुलासा किया कि पवार और रेड्डी ने रिश्वत लेने के लिए एक कोड भाषा तैयार की थी। रेड्डी के लिए ‘D’ और पवार के लिए ‘C’ शब्द का इस्तेमाल होता था। आर्किटेक्ट और बिल्डरों के बयान के अनुसार, अनुमति की बातचीत ‘स्क्वेयर फीट’ के आधार पर होती थी।

29 जुलाई को ईडी टीम पवार के घर पहुंची तो उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। पुलिस की मदद से ताला तोड़कर जब अधिकारी अंदर पहुंचे, तो पाया कि पवार ने अपने फोन से कॉल लॉग और व्हाट्सऐप डेटा डिलीट कर दिया था। यह मामला अब वसई-विरार में भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण की सबसे बड़ी जांचों में से एक बन चुका है, जिसमें कई और खुलासे होने की संभावना है।

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