पश्चिम बंगाल: मां काली प्रतिमा को किया खंडित, पुलिस कह रही ‘हल्का सा नुकसान’ हुआ

भाजपा ने टीएमसी सरकार पर लगाया मामले को दबाने का आरोप

पश्चिम बंगाल: मां काली प्रतिमा को किया खंडित, पुलिस कह रही ‘हल्का सा नुकसान’ हुआ

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पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में रविवार (21 दिसंबर) सुबह एक गंभीर घटना सामने आई, जब जयनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हरिनारायणपुर ग्राम पंचायत के रायदनगर गांव में स्थित देवी काली की एक प्रतिमा का सिर खंडित किया पाया गया। इस घटना के सामने आते ही स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश फैल गया और इलाके में तनाव का माहौल बन गया। लोगों ने इसे हिंदू आस्था पर सीधा हमला बताते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने क्षतिग्रस्त प्रतिमा को हटाकर उसकी जगह नई प्रतिमा स्थापित कर दी। हालांकि, अब तक इस कृत्य में शामिल लोगों की पहचान या गिरफ्तारी नहीं की गई है, दौरान मामले को दबाने और साक्ष्य मिटाने के आरोप भी सामने आए हैं।

पश्चिम बंगाल पुलिस ने पूरे मामले को कमतर आंकते हुए प्रतिमा को थोड़ा क्षतिग्रस्त बताया। पुलिस ने यह भी दावा किया कि कुछ समूह जानबूझकर गलत जानकारी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया, “प्रतिमा को स्थानीय मंदिर समिति द्वारा स्थानीय पुलिस की सक्रिय सहायता से तुरंत बदल दिया गया। एक विशेष मामला दर्ज किया गया है और शरारत करने वालों की पहचान के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।”

बजाए आरोपियों को ढूंढकर कार्रवाई करने के पुलिस घटना के बारे में प्रचार करने वालों को चेतावनी दे चुकी है कि भड़काऊ और झूठी जानकारी फैलाकर अशांति फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और साथ ही कहा है की नागरिकों से अनुरोध है कि अफवाहों पर ध्यान न दें।

दौरान भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल यूनिट ने पुलिस के इस रुख पर कड़ा ऐतराज जताया है। भाजपा का आरोप है कि सिविक पुलिस ने चुपचाप दूसरी प्रतिमा लाकर क्षतिग्रस्त मूर्ति की जगह स्थापित की, ताकि असली घटना को दबाया जा सके। पार्टी ने पुलिस की इस कार्रवाई को मामले को दबाने की खुली कोशिश करार दिया है और कहा कि इससे हिंदू समाज में भारी आक्रोश है, जिसके चलते विरोध प्रदर्शन शुरू हुए।

भाजपा ने सवाल उठाते हुए कहा, “ममता बनर्जी गृह मंत्री हैं। पुलिस अपराधियों को पकड़ने के बजाय इस मुद्दे को क्यों दबाने की कोशिश कर रही है?”

वरिष्ठ भाजपा नेता और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी घटना की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और सड़क जाम करने का विरोध करने वालों के साथ मारपीट की। उन्होंने कहा, “इतना ही नहीं, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने अपराधियों को पकड़ने की कोशिश करने के बजाय एक सिविक वॉलंटियर से नई प्रतिमा मंगवाकर उसे स्थापित करने का प्रयास किया।”

सुवेंदु अधिकारी ने तीखा सवाल करते हुए कहा, “कब तक ऐसा चलता रहेगा? ममता बनर्जी के कुशासन और तुष्टीकरण की राजनीति का खामियाजा हिंदुओं को कब तक भुगतना पड़ेगा?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब तक इस तरह के मामलों में किसी को जवाबदेह नहीं ठहराया गया है, जिसका मुख्य कारण वोट बैंक की राजनीति है।

भाजपा नेता ने चेतावनी दी कि यदि तुष्टीकरण की नीति अपनाने वाली इस सरकार को जल्द नहीं हटाया गया, तो आने वाले दिन हिंदू समाज के लिए और भी भयावह हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “मैं सभी हिंदुओं से, चाहे वे किसी भी पार्टी से जुड़े हों, अपील करता हूं कि लोकतांत्रिक तरीके से इस सरकार को बदलने के लिए एकजुट हों। यह एक तत्काल आवश्यकता है, अन्यथा इस बेशर्म प्रशासन की नींद नहीं टूटेगी और हिंदू आस्था पर ऐसे हमले बार-बार होते रहेंगे।”

फिलहाल, घटना को लेकर इलाके में तनाव बना हुआ है और प्रशासन स्थिति पर नजर रखने की बात कह रहा है, जबकि विपक्ष दोषियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ा हुआ है।

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