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Friday, January 9, 2026
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अब गूंगे क्यों हो गए मनुवादविरोधी?

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– राज सोनी-

मानव सृष्टि के जनक मनु ने न कभी यह किया था और न ही कभी किसी से करने के लिए कहा था, बावजूद इसके जब भी कोई जातिवादी-वर्णवादी-छुआछूतवादी या अन्य किसी भी बुराई का मुद्दा उठता है, तब सबसे पहले उन्हीं का नाम बदनाम किया जाता है, यह मानव सभ्यता के विकास की विडंबना ही कही जा सकेगी !

चलिए, बात अपने यहीं से शुरू करते हैं। कुछ ही महीनों पहले उत्तरप्रदेश के हाथरस में एक दलित समाज की युवती का रेप के बाद मर्डर कर दिए जाने के मामले में महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता डॉ. नितिन राउत, जो मौजूदा वक्त खुद को दलितों का मसीहा जताते हैं, ने कुछ ही महीने पहले उत्तरप्रदेश के हाथरस में दलित समाज की युवती का रेप के बाद मर्डर कर दिए जाने के मामले को मनुवादी मानसिकता का ज्वलंत उदाहरण बताते हुए कहा था कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्त्रियों को लेकर भूमिका इसी की अभिव्यक्ति है। यह भी कहा था कि इससे समूचे देश में पिछड़े, दलित व आदिवासी समाज की स्त्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो गया है।

लिहाजा, पुनः सामाजिक-राजनीतिक क्रांति किए जाने के सिवा अब कोई विकल्प नहीं है। साहेब, महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री हैं और काँग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। बहुत ही जिम्मेदाराना ओहदे पर हैं। हैं तो वे स्वयंघोषित राष्टीय दलित नेता ही, पर महाराष्ट्र का जिक्र पहले इसलिए किया, पहले ही बात घर से करने की हुई थी और कांग्रेस राज्य की तिगली ठाकरे सरकार में साझेदार है। उनके बयान पर ही गौर कीजिए, कितना सामाजिक है या राजनीतिक। चलिए, यह आप पर ही छोड़ देते हैं।

अब यह बताइए, भला उनके उक्त बयान को सामाजिक कैसे बताया जा सकता है ? अगर सामाजिक होते वे, तभी तो सामाजिक बात करते। क्या हुआ ? राउत साहेब अब क्या गूंगे हो गए हैं या कुर्सी की मजबूरी है, जो राज्य में बेतहाशा जारी सत्ता के दुरुपयोग और अराजकता के खिलाफ बोलने नहीं देती। जब देश की वित्तीय-वाणिज्यिक राजधानी मुंबई के साकीनाका इलाके में एक और निर्भया कांड अंजाम लेता है, पुणे में हफ्ते भर के भीतर इस तरह की 4 जघन्य वारदात हो जाती हैं, वसई, पिंपरी और अमरावती से भी इस तरह की ताजा घटनाएं सामने आती हैं, तब कहाँ गया वह जिम्मेदाराना व्यक्तित्व ? यह गहरी चुप्पी क्यों ?

अरे, जिनके मन में इंसानियत की संवेदना प्रवाहित हुआ करती है, वे झट फट पड़ते हैं ऐसे हालात में। महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल को ही ले लीजिए, उन्होंने बलात्कार की इन बर्बर घटनाओं में संलिप्त आरोपियों को कठोर दंड देने की मांग करते हुए कहा है कि राज्य में पुलिस और कानून का नियंत्रण नही रहा, ठाकरे सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। भाजपा विधायक एवं पार्टी के मुंबई प्रभारी अतुल भालखलकर ने अत्याचार के बाद अस्पताल में मौत को मात देने में नाकाम रही इस बदनसीब को श्रद्धांजलि देते हुए साफ कह दिया है कि ठाकरे सरकार के राज में कानून-व्यवस्था बेलगाम हो गई है, जब सरकार में ही महिलाओं का शोषण करने वाले बैठे हों, तो भला गुनहगारों को सजा कैसे मिल सकती है ?

मुंबई के ही अंधेरी (पश्चिम) के भाजपा विधायक अमित साटम ने तो मुंबई समेत राज्य में बेकाबू हो गई कानून-व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और मुंबई के पुलिस आयुक्त हेमंत नगराले को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में राज्य के गृह विभाग को परिवहन मंत्री चला रहा हो, तब तो कानून-व्यवस्था को निचले स्तर तक पहुंचना ही था।

साटम ने इन बदतर हालात के लिए मुख्यमंत्री से तत्काल नगराले को कुर्सी से उठाकर घर बिठा देने की मांग करते हुए कहा है कि जब तक मुंबई पुलिस में वाजेगिरी चलती रहेगी, कोरोनारोधी नियमों का पालन कराने के बहाने बार वालों और व्यापारियों से हफ्तावसूली होती रहेगी, तब तक कानून-व्यवस्था यूं ही तार-तार होती रहेगी। साटम ने यह रहस्योद्घाटन भी किया है कि उनके पास कुछ उन आईपीएस अफसरों के खिलाफ सबूत मौजूद हैं, जो लाइजनिंग एजेंट के जरिए मोटी रकम के बदले पुलिस आयुक्त से मनमाना आर्डर मजूर कराने के जुर्म में संलिप्त हैं।

शहजाद पूनावाला ने भी ट्वीट कर पुणे की कमसिन बच्चियों और मुंबई की निर्भया के संग हुई वारदात को बेहद जघन्य बताते हुए इस हाथरस लॉबी को आड़े हाथों लिया है तथा उनके दिमागी दिवालिएपन पर लानत भेजते हुए कहा है कि वह अब खामोश क्यों है ? क्या प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया सभी जगह मुंबई समेत महाराष्ट्र में फैली भीषण अराजकता को लेकर हाहाकार मची हुई है। ठाकरे सरकार का स्यापा हो रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स सीधे सवाल उठा रहे हैं कि अब हाथरस लॉबी चुप क्यों बैठी है ? कहाँ चली गई सारी नैतिकता-सामाजिकता ?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कितनी मार्मिक और बर्बर घटना है मुंबई की ताजा निर्भया की। उसके संग न सिर्फ बलात्कार किया, बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाल दी, जिससे देर तक खून रहने के कारण तड़प-तड़प कर मौत हो गई। मृतका की 13 और 16 साल की दो बेटियां हैं। वे मुंबई में ही रहती हैं। पीड़िता घर का खर्च चलाने के लिए प्राइवेट नौकरी करती थी। जिस दरिंदे ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया, उसे रोजाना का नशेड़ी बताया जा रहा है और उस दिन भी वह नशे में ही था। दरिंदे ने अपना गुनाह कबूल करते हुए यह खुद बताया है। आखिर कहाँ से मुहैया होते हैं नशीले पदार्थ ? कौन करता है इनका गोरखधंधा ? कहाँ-कहाँ के इनके ठिकाने ? और यह सब किसकी शह पर चलता है ? यह अत्यंत शोचनीय विषय है।

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