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Monday, January 5, 2026
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अरविंद केजरीवाल सिसोदिया बनाएंगे बलि का बकरा ?  

क्या अरविंद केजरीवाल कहेंगे की दिल्ली में लागू की गईं नई शराब नीति के बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी. ऐसा कहकर क्या केजरीवाल मनीष सिसोदिया को बलि का बकरा बनाने वाले है. 

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बड़ी मुश्किल बाबा, बड़ी मुश्किल….  यह गाना दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर फिलहाल सटीक बैठ रहा है। उनके मंत्री, पार्षद यहां तक की नेता भी भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे हुए हैं। अब खुद केजरीवाल भी उसी खांचे में बैठते नजर आ रहे हैं। सीबीआई ने शुक्रवार को केजरीवाल को दिल्ली की नई शराब नीति के जरिये किये गए घोटाले में समन भेजा है और 16 अप्रैल को सुबह 11 बजे सीबीआई ऑफिस में पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब केजरीवाल की गिरफ्तारी होगी। एक अहम सवाल यह भी है कि सीबीआई दिल्ली के सीएम केजरीवाल से कौन-कौन से सवाल पूछ सकती है। क्या केजरीवाल यह कहेंगे कि नई शराब नीति के बारे में वे कुछ नहीं जानते ? क्या केजरीवाल अपना गला छुड़ाने के लिए मनीष सिसोदिया को बलि का बकरा बनाएंगे ? इतना ही नहीं क्या अरविंद मनीष सिसोदिया की तरह तामझाम के साथ सीबीआई कार्यालय जाएं या सादगी के साथ ? क्योंकि कहा जा रहा है कि पार्टी के कार्यकर्ता ऐसे किसी प्रदर्शन के लिए तैयार हैं। ये तमाम सवाल है जो हर किसी के दिमाग में कौंध रहे हैं। आज हम इसी कुछ सवालों के जवाब ढूढने की कोशिश करेंगे।

तो दोस्तों, हम कोई लागलपेट के बजाय सीधे मुद्दे पर आते हैं। दरअसल, दिल्ली की नई शराब नीति लागू होने के बाद, यह आरोप लगाया गया कि दिल्ली की सरकार ने पॉलिसी के जरिये शराब कारोबारियों फ़ायदा पहुंचाई। इतना ही नहीं इस मामले में आम आदमी पार्टी पर आरोप हैं कि शराब नीति के जरिये मिले 100 करोड़ रुपये का इस्तेमाल पार्टी ने गोवा और पंजाब चुनाव में किया है। गौरतलब है कि 2021 में दिल्ली में नई शराब नीति लागू की गई थी। इसके बाद से ही यह नीति सवालों के घेरे में थी। इसके बाद बीते साल भारी विरोध के बाद दिल्ली सरकार ने इस नई शराब नीति को वापस ले लिया था और दोबारा पुरानी शराब नीति को लागू कर दिया था।

अब सवाल यह कि क्या केजरीवाल को नई शराब नीति के बदलाव के बारे में जानकारी नहीं थी। यह बहुत अहम सवाल है। क्योंकि इसी के साथ केजरीवाल और उनकी पार्टी का भविष्य तय होना है। कुछ माह बाद ही लोकसभा का चुनाव होना है। ऐसे में केजरीवाल पर लगे आरोप उनकी पार्टी के बुरा साबित हो सकता है। हालांकि, केजरीवाल ऐसा नहीं कह सकते की उन्हें इस नई नीति के बारे में जानकारी नहीं थी। क्योंकि इस नीति को लाने से पहले उनके विश्वासपात्र और दाहिना हाथ कहे जाने वाले मनीष सिसोदिया ने जरूऱ कुछ बताया होगा।

मनीष सिसोदिया केजरीवाल के परमिशन के बिना इसे लागू नहीं किये होंगे। भले केजरीवाल के पास आज तक कोई विभाग न हो. मगर सरकार की कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता सीएम ही करते हैं। ऐसे में उनका इंकार पार्टी कार्यकर्ताओं पर बड़ा असर  डाल सकता है। इस संबंध में बीजेपी ने भी शनिवार को पूछा कि आखिर केजरीवाल यह कैसे कह सकते हैं कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जबकि 5 फरवरी 2021 को दिल्ली की नई शराब नीति के प्रस्ताव को पारित करने के लिए कैबिनेट की बैठक बुलाई गई थी, जिसकी अध्यक्षता खुद अरविंद केजरीवाल कर रहे थे।

अब अगर केजरीवाल यह कहते हैं कि उन्हें इस नीति के लागू होने की जानकारी नहीं थी तो साफ़ है कि वे खुद का गला छुड़ाने के लिए मनीष सिसोदिया को बलि का बकरा बना रहे हैं क्योंकि आबकारी विभाग मनीष सिसोदिया के पास था ,ऐसे में यह साफ़ है कि इस नीति को लागू करने के लिए सिसोदिया की मुख्य भूमिका रही होगी, साथ ही इससे जुड़े सभी दस्तावेजों पर सिसोदिया का ही हस्ताक्षर हुआ होगा। ऐसे में अब देखना होगा कि केजरीवाल अब कौन सा दाव चलते हैं। क्योंकि केजरीवाल के लिए यह कहना आसान होगा कि उनके पास कोई विभाग ही नहीं है तो फिर इस मामले में वे कैसे आरोपी हो सकते है।

केजरीवाल का तर्क अपनी जगह सही हो सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री होने के नाते इसकी जबाबदेही भी उनकी ही होगी। उनकी जानकारी के बिना कोई भी मंत्री कैसे कोई नई नीति लागू कर सकता है। एक बात और, केजरीवाल के इंकार के बाद उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठना तय है। क्योंकि अब तक यह सवाल उठ रहे थे कि तीन बार मुख्यमंत्री बनने के बाद भी केजरीवाल ने कोई विभाग अपने पास क्यों नहीं रखा। जिसके बारे में कहा जाता रहा है कि केजरीवाल ने ऐसा जानबूझकर करते है।

जानकारों के अनुसार कहा जाता है कि केजरीवाल ऐसा इसलिए करते हैं कि वे कोई लफड़े में न पड़े। आईएस अधिकारी रह चुके केजरीवाल को यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि अगर किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करना अपना अंगूठा काटकर देने जैसा है। जो बाद में एक सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। बहरहाल, देखना होगा कि केजरीवाल कल यानी रविवार को इन सवालों पर क्या जवाब देते हैं।

माना जा रहा है कि सीबीआई केजरीवाल से यह भी पूछ सकती है कि उनका समीर महेन्द्रू से क्या संबंध है। क्या उन्होंने कभी महेन्द्रू से फेसटाइम के जरिये बातचीत की है। शनिवार को बीजेपी भी ऐसा ही सवाल पूछा था। गौरतलब है कि शराब नीति घोटाले में ईडी द्वारा फ़ाइल की गई चार्जशीट में यह कहा गया है कि केजरीवाल ने समीर महेन्द्रू से फेसटाइम के जरिये बात की थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने शराब कारोबारी समीर महेन्द्रू से कहा था कि विजय नायर मेरा आदमी है। जिस आप भरोसा जता सकते हो।

बता दे कि विजय नायर वही शख्स हैं जिन पर शराब घोटाले में रिश्वत लेनदेन का आरोप लगा है। दरअसल, समीर महेन्द्रू ने जांच अधिकारियों को बताया था कि विजय नायर ने केजरीवाल से मुलाक़ात तय की थी, लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्होंने फेसटाइम के जरिये केजरीवाल से बात कराई थी। इसके बाद दोनों शराब कारोबारियों के साथ मिलकर कई बैठकें की थी। अब सवाल यह कि रविवार को केजरीवाल क्या तामझाम के साथ सीबीआई ऑफिस पहुंचेगे। क्योंकि मनीष सिसोदिया से जब -जब बुलाया गया। वे भ्रष्टाचार को विजय की तरह देखा और अपने समर्थकों के साथ जुलूस निकाला। तो क्या केजरीवाल भी तिलक लगाकर ,दही खाकर पूछताछ के लिए जाएंगे।

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