सीबीएसई ने 6 नवंबर को सभी संबद्ध विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को जारी पत्र में बताया कि परीक्षा की समय-सारिणी तैयार करने से पहले विद्यार्थियों द्वारा चुने गए विषयों, प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं की संभावित तारीखों और परीक्षा केंद्रों पर विद्यार्थियों की संख्या सहित कई महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखा गया है।
परीक्षा की समय-सारिणी तैयार करते समय उन विषयों के बीच पर्याप्त अंतर रखा गया है, जिन्हें विद्यार्थी अक्सर एक साथ चुनते हैं। इससे विद्यार्थियों को एक विषय की परीक्षा के बाद दूसरे विषय की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
बोर्ड ने बताया कि परीक्षा कार्यक्रम बनाते समय किसी एक दिन परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की संख्या का भी आकलन किया गया है, ताकि परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके। इसके अलावा, परीक्षा कार्यक्रम इस तरह तैयार किया गया है कि मूल्यांकन के दौरान शिक्षकों को लंबे समय तक अपने विद्यालयों से दूर न रहना पड़े। इससे विद्यालयों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित नहीं होंगी।
सीबीएसई ने बताया कि समय-सारिणी तैयार करते समय 40 हजार से अधिक विषय संयोजनों को ध्यान में रखा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी विद्यार्थी के चुने हुए दो विषयों की परीक्षाएं एक ही दिन न पड़ें। बोर्ड की सभी परीक्षाएं भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू होंगी। समय-सारिणी पहले जारी करने से विद्यार्थियों और स्कूलों को फायदा होगा।
सीबीएसई के अनुसार, इस बार समय-सारिणी पहले जारी करने से विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई की बेहतर योजना बनाने का अवसर मिलेगा। इससे परीक्षा को लेकर तनाव कम करने और बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी।
वहीं, परीक्षा केंद्रों के रूप में निर्धारित विद्यालयों को आवश्यक इंतजाम और अपनी नियमित गतिविधियों की योजना बनाने में सुविधा होगी। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि समय-सारिणी समय पर जारी करना विद्यालयों की ओर से विद्यार्थियों की सूची जमा करने की प्रक्रिया पूरी होने के कारण संभव हो पाया है। विद्यार्थियों के विषय संयोजनों से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद ही अंतिम परीक्षा कार्यक्रम तैयार किया गया।
