केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव की अध्यक्षता में यह समीक्षा बैठक सोमवार को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-1 से वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में केंद्र सरकार के अस्पताल, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाले अन्य कार्यालयों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने जोर देकर कहा कि यह अभियान केवल प्रतीकात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने संस्थानों को 27 अक्टूबर को होने वाली ‘कायाकल्प’ गतिविधियों में पूरे उत्साह के साथ भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके साथ ही, यह सुनिश्चित करने को कहा कि किए गए सुधार स्पष्ट रूप से दिखाई दें और उनकी पुष्टि की जा सके।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि चिन्हित 100 प्रतिशत स्थलों की सफाई पूरी हो चुकी है, सार्वजनिक शिकायतों का लगभग 100 प्रतिशत समाधान किया जा चुका है, और नीलामी और सफाई अभियानों के माध्यम से लगभग 50 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है।
इस चर्चा का मुख्य केंद्र ‘रिड्यूस, रीयूज और रीसाइकिल’ के सिद्धांतों को प्रभावी ढंग से लागू करना था। इसके साथ ही, स्वच्छता और साफ-सफाई के उपाय, कीट नियंत्रण, बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन, ई-कचरे का निपटान और सार्वजनिक स्थानों के बेहतर रखरखाव पर भी जोर दिया गया।
संस्थानों को पुराने रिकॉर्ड और बेकार सामग्री का निपटान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिसमें ई-नीलामी भी शामिल है, ताकि उपयोगी जगह बनाई जा सके और जहां संभव हो, राजस्व भी अर्जित किया जा सके।
कुछ संस्थानों ने लंबे समय से पड़े कबाड़ का अधिकृत नीलामी प्लेटफॉर्म के जरिए निपटान किया, जिससे राजस्व भी जुटा और परिसर में अतिरिक्त जगह भी उपलब्ध हुई। कई संस्थानों ने शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्यूआर कोड-आधारित फीडबैक सिस्टम भी शुरू किए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि अभियान के प्रभाव का आकलन आगंतुकों और लाभार्थियों से मिलने वाले सीधे फीडबैक के जरिए भी किया जाना चाहिए।
इस समीक्षा बैठक में देशभर के 336 केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें एम्स गुवाहाटी, एम्स ऋषिकेश, एम्स भुवनेश्वर, निमहंस बेंगलुरु, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, सफदरजंग अस्पताल और रिम्स इंफाल जैसे संस्थान शामिल थे।



