दरअसल, 3 मई को पेपर लीक होने के बाद नीट यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को होनी है। इसी को लेकर एक छात्र ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि टेलीग्राम को कुछ समय के लिए बंद करना अच्छा और बुरा, दोनों है।
उन्होंने कहा, “सरकार का मानना है कि पेपर लीक टेलीग्राम के जरिए होते हैं, इसलिए एक तरह से इसे रोकना अच्छा कदम है, लेकिन इससे पढ़ाई पर भी असर पड़ता है। हम पढ़ाई के लिए भी टेलीग्राम का इस्तेमाल करते थे।”
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बैन लगाने के नुकसान बताते हुए उन्होंने कहा, “हमें वहां से पिछले वर्ष के पेपर, सेल्फ-स्टडी मटीरियल और प्रैक्टिस के लिए दूसरी चीजें मिलती थीं, इसलिए अब मुश्किल होगी। पढ़ाने से जुड़ी चीजों की पीडीएफ भी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध थीं।”
एक और छात्र ने कहा कि टीचर प्लेटफॉर्म पर प्रैक्टिस के लिए सवाल देते थे, जिससे परीक्षा की तैयारी में मदद मिलती थी।
कोटा के एक इंस्टिट्यूट में परीक्षा के लिए कोचिंग क्लास ले रहे एक छात्र ने कहा, “मुझे लगता है कि केंद्र सरकार ने टेलीग्राम पर बैन लगाकर अच्छा किया है, लेकिन डिस्कॉर्ड, स्नैपचैट और व्हाट्सएप जैसे दूसरे ऐप्स भी हैं। कुछ ऐसा किया जाना चाहिए, जिससे पेपर लीक बिल्कुल न हों।”
उन्होंने जोर देकर कहा, “टेलीग्राम को बंद करना सिर्फ उस गलती को छिपाना है, जो हो चुकी है, लेकिन इससे भविष्य की समस्याएं नहीं रुकेंगी।”
केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए एक और छात्र ने ऐसे स्थायी उपाय करने की अपील की जिससे यह पक्का हो सके कि ऐसी गड़बड़ियां दोबारा न हों।
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को नीट यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले पूरे भारत में टेलीग्राम की सर्विस को कुछ समय के लिए बंद करने के केंद्र के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने इमरजेंसी ब्लॉकिंग पावर का इस्तेमाल करते समय कानून के तहत तय प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया था।
टेलीग्राम ने पूरे भारत में 22 जून तक अपनी सर्विस को कुछ समय के लिए बंद करने और 30 जून तक अपने मैसेज-एडिटिंग फीचर को बंद करने के केंद्र के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
