तकनीक ने आधुनिक युद्ध की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। आज कुछ लाख रुपये के ड्रोन भी हजारों करोड़ रुपये के सैन्य प्लेटफॉर्म को नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय नौसेना स्वदेशी तकनीक से लैस आधुनिक युद्धपोतों को अपने बेड़े में शामिल कर रही है।
नौसेना में शामिल हुए इन दोनों प्लेटफॉर्म के नाम भारतीय पौराणिक कथाओं से प्रेरित हैं। एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट दूनागिरी का नाम हिमालय के द्रोणागिरी पर्वत से लिया गया है।वहीं एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रय का इंसिग्निया महाभारत के महान धनुर्धर अर्जुन के गांडीव धनुष से प्रेरित है। प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट है।
आईएनएस दूनागिरी दुश्मन के रडार से बचते हुए लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस है और सर्फेस , एयर और सबमरीन—तीनों तरह के खतरों का मुकाबला कर सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईएनएस दूनागिरी को भारतीय नौसेना में शामिल किया। इससे पहले 30 मार्च 2026 को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित इस पांचवें गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट को नौसेना को सौंपा था।
आईएनएस दूनागिरी के कमिशनिंग कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन दिव्य आलोक ने कहा, “यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मुझे इस जहाज का कमिशनिंग कमांडिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। दूनागिरी का नाम द्रोणागिरी पर्वत से लिया गया है। जिस प्रकार हनुमान जी लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए पूरा पर्वत उठा लाए थे, हम भी उसी जज्बे और समर्पण की भावना को अपने साथ लेकर चलते हैं।”
उन्होंने बताया कि यह अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट बेहद कम रडार क्रॉस-सेक्शन के साथ डिजाइन किया गया है, जिससे दुश्मन के लिए इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है। जहाज अत्याधुनिक सेंसर, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम से लैस है। यह सर्फेस, एयर और पानी के अंदर—तीनों डोमेन में प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है। सेंसरों से मिले डेटा का विश्लेषण कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम द्वारा किया जाता है, जिससे प्रतिक्रिया समय काफी कम हो जाता है।
दूनागिरी, पुराने आईएनएस दूनागिरी का आधुनिक वर्जन है, जो लींडर क्लास का फ्रिगेट था और 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक नौसेना का हिस्सा रहा। प्रोजेक्ट 17ए के तहत कुल सात नीलगिरी क्लास फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें से पहला आईएनएस नीलगिरी जनवरी 2025 में नौसेना में शामिल हुआ था। इसके बाद हिमगिरी और उदयगिरी को शामिल किया गया।
इसके अलावा यह वॉरशिप बराक-8 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल आधुनिक एयर डिफेंस गन स्वदेशी टॉरपीडो ‘वरुणास्त्र’, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम मल्टी-फंक्शन रडार जैसी अत्याधुनिक सिस्टम से लेस हैं।
भारतीय नौसेना का स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘अग्रय’ आधुनिक हथियारों और उन्नत सेंसर प्रणालियों से पूरी तरह सुसज्जित है। इस युद्धपोत की अचूक और मारक क्षमता को देखते हुए ही इसका इंसिग्निया महाभारत के महान योद्धा अर्जुन के ‘गांडीव’ धनुष को चुना गया है।
कमांडर सुनील मलपोत्रा ने आगे कहा कि इसका संदेश साफ है कि अर्जुन का गांडीव हमें प्रेरणा देता है कि गांडीव अपना टार्गेट कभी मिस नहीं करता था और हम उम्मीद करते हैं वॉर जोन में यह भी अपना टार्गेट मिस नहीं करेंगा।
दुश्मनों के सबमरीन को ढूंढने और उसके शिकार करने के मकसद से भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना शुरू की थी। साल 2019 में 16 वॉरशिप के निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था, जिनमें आठ कोचिन शिपयार्ड और आठ जीआरएसई में बनाए जा रहे हैं।
इस क्राफ्ट की खासियत है कि यह एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार वेरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है। यह जहाज 25 नॉट की रफ्तार से चल सकता है और तकरीबन 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम है। तटीय क्षेत्रों में यह 100 से 150 नॉटिकल मील तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकता है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने योग किया, आंगनबाड़ी बनें गर्भ संस्कार केंद्र!
