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Friday, June 26, 2026
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हनुमान शक्ति और गांडीव क्षमता से सुसज्जित भारतीय नौसेना आईएनएस दूनागिरी और प्रलय!

तकनीक ने आधुनिक युद्ध की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। आज कुछ लाख रुपये के ड्रोन भी हजारों करोड़ रुपये के सैन्य प्लेटफॉर्म को नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। 

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भारतीय नौसेना में शामिल हुए एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस दूनागिरी और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस अग्रय आधुनिक समुद्री युद्ध क्षमता को नई मजबूती देगा। एक ओर दूनागिरी दुश्मन के रडार को चकमा देकर सटीक हमला करने में सक्षम है, वहीं अग्रय पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करने की क्षमता रखता है। ये दोनों युद्धपोत असममित वॉर और अंडरवॉटर स्ट्राइक क्षमताओं के क्षेत्र में भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाएंगे।

तकनीक ने आधुनिक युद्ध की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। आज कुछ लाख रुपये के ड्रोन भी हजारों करोड़ रुपये के सैन्य प्लेटफॉर्म को नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय नौसेना स्वदेशी तकनीक से लैस आधुनिक युद्धपोतों को अपने बेड़े में शामिल कर रही है।

नौसेना में शामिल हुए इन दोनों प्लेटफॉर्म के नाम भारतीय पौराणिक कथाओं से प्रेरित हैं। एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट दूनागिरी का नाम हिमालय के द्रोणागिरी पर्वत से लिया गया है।वहीं एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रय का इंसिग्निया महाभारत के महान धनुर्धर अर्जुन के गांडीव धनुष से प्रेरित है। प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट है।

आईएनएस दूनागिरी दुश्मन के रडार से बचते हुए लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस है और सर्फेस , एयर और सबमरीन—तीनों तरह के खतरों का मुकाबला कर सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईएनएस दूनागिरी को भारतीय नौसेना में शामिल किया। इससे पहले 30 मार्च 2026 को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित इस पांचवें गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट को नौसेना को सौंपा था।

आईएनएस दूनागिरी के कमिशनिंग कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन दिव्य आलोक ने कहा, “यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मुझे इस जहाज का कमिशनिंग कमांडिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। दूनागिरी का नाम द्रोणागिरी पर्वत से लिया गया है। जिस प्रकार हनुमान जी लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए पूरा पर्वत उठा लाए थे, हम भी उसी जज्बे और समर्पण की भावना को अपने साथ लेकर चलते हैं।”

उन्होंने बताया कि यह अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट बेहद कम रडार क्रॉस-सेक्शन के साथ डिजाइन किया गया है, जिससे दुश्मन के लिए इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है। जहाज अत्याधुनिक सेंसर, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम से लैस है। यह सर्फेस, एयर और पानी के अंदर—तीनों डोमेन में प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है। सेंसरों से मिले डेटा का विश्लेषण कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम द्वारा किया जाता है, जिससे प्रतिक्रिया समय काफी कम हो जाता है।

दूनागिरी, पुराने आईएनएस दूनागिरी का आधुनिक वर्जन है, जो लींडर क्लास का फ्रिगेट था और 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक नौसेना का हिस्सा रहा। प्रोजेक्ट 17ए के तहत कुल सात नीलगिरी क्लास फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें से पहला आईएनएस नीलगिरी जनवरी 2025 में नौसेना में शामिल हुआ था। इसके बाद हिमगिरी और उदयगिरी को शामिल किया गया।

मार्च 2026 में तारागिरी नौसेना में शामिल किया गया था अब जून में दूनागिरी को। इन सभी फ्रिगेट्स में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली लगी है, जो एंटी-शिप और एंटी-सर्फेस युद्ध में बेहद प्रभावी मानी जाती है।

इसके अलावा यह वॉरशिप बराक-8 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल आधुनिक एयर डिफेंस गन स्वदेशी टॉरपीडो ‘वरुणास्त्र’, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम मल्टी-फंक्शन रडार जैसी अत्याधुनिक सिस्टम से लेस हैं।

यह फ्रिगेट दुश्मन के हमलों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं और इसका डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। 6,700 टन वजनी यह युद्धपोत 30 नॉट की अधिकतम गति से चल सकता है।

भारतीय नौसेना का स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘अग्रय’ आधुनिक हथियारों और उन्नत सेंसर प्रणालियों से पूरी तरह सुसज्जित है। इस युद्धपोत की अचूक और मारक क्षमता को देखते हुए ही इसका इंसिग्निया महाभारत के महान योद्धा अर्जुन के ‘गांडीव’ धनुष को चुना गया है।

‘अग्रय’ के प्रथम कमांडिंग ऑफिसर सुनील मल्होत्रा ने युद्धपोत की क्षमताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि आकार में छोटा दिखने के बावजूद यह जहाज आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस एक घातक प्लेटफॉर्म है। उन्होंने बताया कि यह पोत दुश्मन की किसी भी पनडुब्बी को सटीकता से निशाना बनाने और समुद्र की सतह पर ‘एसिमेट्रिक वॉरफेयर’ से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।
इसके रक्षा बेड़े में स्वदेशी सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, अत्याधुनिक रॉकेट लॉन्चर और टॉरपीडो ट्यूब शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, दुश्मन के टॉरपीडो को हवा में ही नाकाम करने के लिए इसमें उन्नत डिकॉय सिस्टम और एसिमेट्रिक वॉरफेयर के दौरान सुरक्षा के लिए स्टेबलाइज्ड रिमोट-कंट्रोल्ड गन लगाई गई है।

कमांडर सुनील मलपोत्रा ने आगे कहा कि इसका संदेश साफ है कि अर्जुन का गांडीव हमें प्रेरणा देता है कि गांडीव अपना टार्गेट कभी मिस नहीं करता था और हम उम्मीद करते हैं वॉर जोन में यह भी अपना टार्गेट मिस नहीं करेंगा।

दुश्मनों के सबमरीन को ढूंढने और उसके शिकार करने के मकसद से भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना शुरू की थी। साल 2019 में 16 वॉरशिप के निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था, जिनमें आठ कोचिन शिपयार्ड और आठ जीआरएसई में बनाए जा रहे हैं।

इसी परियोजना के तहत निर्मित अग्रेह को भी नौसेना में शामिल किया जा रहा है। इससे पहले आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त, आईएनएस माहे और आईएनएस  अंजदीप को नौसेना में शामिल किया जा चुका है।

इस क्राफ्ट की खासियत है कि यह एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार वेरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है। यह जहाज 25 नॉट की रफ्तार से चल सकता है और तकरीबन 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम है। तटीय क्षेत्रों में यह 100 से 150 नॉटिकल मील तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकता है।

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