28.1 C
Mumbai
Thursday, November 5, 2026
होमदेश दुनियापासपोर्ट नागरिकता नहीं, सिर्फ यात्रा दस्तावेज है: पूर्व राजनयिक दीपक वोहरा!

पासपोर्ट नागरिकता नहीं, सिर्फ यात्रा दस्तावेज है: पूर्व राजनयिक दीपक वोहरा!

वोहरा के अनुसार, पासपोर्ट मूल रूप से एक यात्रा दस्तावेज (ट्रैवल डॉक्यूमेंट) है और इसे नागरिकता (सिटिजनशिप) से जोड़ा नहीं जाना चाहिए।

Google News Follow
पासपोर्ट को लेकर चल रही बहस के बीच पूर्व राजनयिक दीपक वोहरा ने पासपोर्ट और नागरिकता के बीच का फर्क समझाया है। आईएएनएस से खास बातचीत में पूर्व राजदूत ने सामान्य और सहज अंदाज में इसके बीच का भेद बताया।

वोहरा के अनुसार, पासपोर्ट मूल रूप से एक यात्रा दस्तावेज (ट्रैवल डॉक्यूमेंट) है और इसे नागरिकता (सिटिजनशिप) से जोड़ा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयता (नेशनलिटी) और नागरिकता दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं, जिन्हें अक्सर लोग एक ही मान लेते हैं।

वोहरा ने कहा कि नागरिकता एक कानूनी दर्जा है, जो जन्म, माता-पिता की नागरिकता या प्राकृतिककरण (नेचुरलाइजेशन) के आधार पर प्राप्त होता है। इसके विपरीत, राष्ट्रीयता का संबंध व्यक्ति की जातीय, सांस्कृतिक या क्षेत्रीय पहचान से भी जोड़ा जा सकता है।

उन्होंने अपने सोवियत संघ के अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया, “वहां पहली पोस्टिंग में मैं जब सोवियत संघ गया तो मुझसे मेरी राष्ट्रीयता पूछी गई थी। तब मैंने खुद को भारतीय बताया, तो उन्हें समझाया कि राष्ट्रीयता का आशय यह जानना था कि मैं भारत के किस क्षेत्र या समुदाय से हूं। उन्होंने ही बताया कि इसका मतलब एथिनिसिटी है यानी आप भारत के किस प्रांत या क्षेत्र से वास्ता रखते हैं।”

वोहरा ने कहा कि पासपोर्ट का इतिहास काफी पुराना है। प्राचीन काल में राजा अपने दूतों को दूसरे राज्यों में भेजते समय सुरक्षा के लिए पत्र देते थे। समय के साथ यही व्यवस्था विकसित होकर आधुनिक पासपोर्ट में बदल गई। 1919 में प्रथम विश्व युद्ध के बाद ‘लीग ऑफ नेशंस’ ने आधुनिक पासपोर्ट प्रणाली को औपचारिक रूप दिया।

पूर्व राजनयिक ने पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य बताया। उन्होंने कहा, “ये किसी व्यक्ति को अपने देश से बाहर यात्रा करने और दूसरे देश में प्रवेश करने की अनुमति देता है। इसलिए यह मूल रूप से यात्रा से संबंधित दस्तावेज है। हालांकि कुछ मामलों में इसमें नागरिकता या राष्ट्रीयता का उल्लेख हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पासपोर्ट ही नागरिकता का प्रमाण है।”

अपने लंबे राजनयिक अनुभव का हवाला देते हुए वोहरा ने बताया कि विशेष परिस्थितियों में सरकारें अस्थायी या विशेष पासपोर्ट भी जारी कर सकती हैं। वोहरा ने कहा, “मैंने उस विभाग में काम किया है। मुझे विदेश सेवा और संबंधित कार्यों में 53 वर्ष हो चुके हैं।

हमने कुछ विशेष मामलों में कुछ लोगों को अस्थायी रूप से भारतीय पासपोर्ट जारी किए थे। उनमें एक बहुत प्रसिद्ध व्यक्ति भी था। उन्हें कहीं जाना था। उस समय प्रधानमंत्री ने निर्णय लिया था कि उन्हें पासपोर्ट दिया जाए। हमने पासपोर्ट जारी किया, वह गए, अपना काम पूरा किया और बाद में लौटकर पासपोर्ट वापस कर दिया।

उन्होंने यह भी बताया कि वो तीन अफ्रीकी देशों के विशेष सलाहकार हैं। इनमें से एक अफ्रीकी देश ने विशेष सलाहकार के रूप में राजनयिक पासपोर्ट जारी किया। “पासपोर्ट” एक फ्रांसीसी शब्द है, जिसका अर्थ है “बंदरगाह पार करना।” वोहरा के मुताबिक, जब उन्होंने उस देश के प्रधानमंत्री से कहा, “सर, आप क्या कर रहे हैं? मैं भारत का नागरिक हूं।” उन्होंने कहा, “इसे खोलकर देखिए कि इसके अंदर क्या लिखा है।”

ऊपर लिखा था-दीपक वोहरा, विशेष सलाहकार आदि। और नीचे नागरिकता के सामने भारतीय लिखा था, जिसके बाद मैंने कहा, “अब मैं संतुष्ट हूं।”

उस देश के पीएम ने कहा, “जो दस्तावेज मैं आपको दे रहा हूं, वह सिर्फ मेरे देश में आने-जाने के लिए है। यह एक तरह के वीजा जैसा है। आपको अलग से वीजा के लिए आवेदन नहीं करना पड़ेगा।” मैंने कहा, “बहुत-बहुत धन्यवाद, सर।”

इससे स्पष्ट होता है कि पासपोर्ट जारी करने वाला देश और नागरिकता का देश हमेशा एक ही हो, यह आवश्यक नहीं है।

वोहरा ने अपनी ग्रैंडडॉटर्स का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका जन्म अमेरिका में हुआ, इसलिए वे अमेरिकी नागरिक हैं। उनके पिता ब्रिटिश नागरिक हैं और उनकी मां भारतीय हैं। ऐसे में उनके पास विभिन्न देशों से जुड़े अधिकार और दस्तावेज हो सकते हैं, लेकिन नागरिकता और राष्ट्रीयता के प्रश्न को कानूनी और व्यावहारिक रूप से अलग-अलग समझना चाहिए।

वोहरा के मुताबिक पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर अनावश्यक राजनीतिक विवाद खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस विषय पर टिप्पणी करने से पहले अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों तथा कांसुलर और राजनयिक संबंधों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों का अध्ययन करें।

उन्होंने दोहराया कि पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, जबकि नागरिकता व्यक्ति की कानूनी पहचान और उसके अधिकारों तथा दायित्वों से जुड़ा विषय है। इसलिए दोनों को एक-दूसरे का पर्याय नहीं माना जाना चाहिए।

यह भी पढ़ें-

साधु-संत नाराज, राम मंदिर चंदा मामले में एफआईआर मांग समर्थित!

National Stock Exchange

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Star Housing Finance Limited
[td_block_social_counter open_in_new_window="y" style="style6 td-social-boxed" block_template_id="td_block_template_9" border_color="#fbd54a" f_header_font_size="26" f_header_font_weight="700" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXRvcCI6IjAiLCJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiMzAiLCJwYWRkaW5nLXRvcCI6IjAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn19" custom_title="हमें फॉलो करें" facebook="NewsDankaHindi" twitter="NewsDanka" youtube="channel/UCqtL0xCsgAmB3XXrh9nln2Q" manual_count_twitter="526" f_header_font_family="668"]

अन्य लेटेस्ट खबरें