स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “स्वामी प्रसाद मौर्य ने पहले भी हमारे पवित्र ग्रंथ रामायण का अपमान किया था।
राम मंदिर चंदे विवाद में विश्व हिंदू परिषद की एफआईआर की मांग पर महंत देवेशाचार्य जी महाराज ने कहा, “हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक ने जो उचित मांग की है, वह सराहनीय है। मैं भी बुधवार को उनका बयान पढ़ और सुन रहा था। यह अच्छी बात है कि आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं, लेकिन सच साफ-साफ सामने आना चाहिए। जब एफआईआर दर्ज होगी और ठीक से जांच होगी, तभी सच पता चल पाएगा कि असल में कौन जिम्मेदार है?”
स्वामी दिलीप दास त्यागी ने भी कहा, “मैं विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष की मांग का स्वागत करता हूं और उन्हें धन्यवाद देता हूं। जो कोई भी यह मांग करता है, मैं तहे दिल से उसका स्वागत करता हूं, और एफआईआर जरूर दर्ज होनी चाहिए।
नासिक में महंत भक्त चरण दास महाराज ने राम मंदिर चंदे से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया दी और भगवान राम पर की गई विवादित टिप्पणियों की निंदा की। उन्होंने कहा कि जांच चल रही है और सच सामने आएगा। उन्होंने कहा, “राम मंदिर चंदा चोरी मामले में दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, भगवान राम मंदिर हिंदुओं के आस्था के केंद्र हैं। इस मामले में सरकार द्वारा कानूनी कार्रवाई बहुत जरूरी है, तभी सच्चाई का पता चलेगा।”
स्वामी प्रसाद के बयान पर महंत भक्त चरण दास ने कहा, “भगवान राम के बारे में गलत बोलना पूरे हिंदू समाज का अपमान है। राम मंदिर में जो हुआ है, उस पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इस तरह स्वामी प्रसाद ने अपशब्द कह कर राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाया है। स्वामी प्रसाद को सोच-समझकर कोई भी बयान देना चाहिए। स्वामी प्रसाद के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।”



