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Thursday, October 15, 2026
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तीन-भाषा नीति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से राहत विचारने कहा! 

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि यह मामला केवल कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि बच्चों और उनके परिवारों की सुविधा से भी जुड़ा हुआ है।

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सीबीएसई की संशोधित तीन भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह कक्षा 6 के छात्रों को भी राहत देने पर विचार करे, जैसी राहत वर्तमान में कक्षा 7 से 10 तक के छात्रों को दी जा रही है। अदालत ने कहा कि नई भाषा व्यवस्था को अचानक लागू करने से छात्रों और उनके परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि यह मामला केवल कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि बच्चों और उनके परिवारों की सुविधा से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने टिप्पणी की कि कक्षा 6 के विद्यार्थियों पर अचानक नई भाषा थोपना उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत आगे चलकर इस मामले से जुड़े संवैधानिक प्रश्नों पर भी विचार करेगी। उन्होंने कहा कि यह तय किया जाना बाकी है कि कौन-सी भाषा को स्वदेशी और कौन-सी भाषा को विदेशी माना जाएगा। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि नई व्यवस्था को जनवरी 2027 से लागू करने पर विचार किया जा सकता है, ताकि छात्रों और अभिभावकों को पर्याप्त तैयारी का समय मिल सके।

वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि वह इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से निर्देश प्राप्त कर कोर्ट को अवगत कराएंगी।

सीबीएसई की संशोधित तीन-भाषा नीति के खिलाफ दाखिल याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि बोर्ड ने कक्षा 6 से दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया है, जिससे छात्रों की शैक्षणिक पसंद और उनके मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर के कई सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र पहले अंग्रेजी, हिंदी और किसी विदेशी भाषा का अध्ययन कर रहे थे, लेकिन शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद स्कूलों ने विदेशी भाषाओं को अचानक बंद कर संस्कृत जैसे विकल्प अपनाने के निर्देश दे दिए, जिससे छात्रों में मानसिक तनाव, चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हुई।

याचिका में दावा किया गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 29 के तहत प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर की पाठ्यचर्या निर्धारित करने का अधिकार एनसीईआरटी को है। ऐसे में कक्षा 6 के लिए सीबीएसई द्वारा जारी संशोधित पाठ्यक्रम कानूनी अधिकार के बिना लागू किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इस नीति के खिलाफ दायर याचिकाओं के एक अन्य समूह पर सुनवाई कर रहा है। इससे पहले अदालत ने केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी कर संशोधित भाषा ढांचे की वैधता पर जवाब मांगा था।

हालांकि, अब तक अदालत ने नीति के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार किया है। अदालत ने कहा था कि अंतिम सुनवाई के दौरान वह शिक्षकों की उपलब्धता, पाठ्यपुस्तकों और अध्ययन सामग्री जैसे व्यावहारिक पहलुओं के साथ-साथ संवैधानिक मुद्दों की भी जांच करेगी।
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