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Wednesday, July 1, 2026
होमदेश दुनियाआतंकवाद का रास्ता छोड़े बिना बातचीत का कोई मतलब नहीं: ध्रुव कटोच!

आतंकवाद का रास्ता छोड़े बिना बातचीत का कोई मतलब नहीं: ध्रुव कटोच!

इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले लोग दोनों देशों की सरकारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते। उन्होंने कहा, "भारत की तरफ से और पाकिस्तान की तरफ से कुछ लोग हैं। 

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भारत और पाकिस्तान के 117 नागरिकों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को दोनों देशों के बीच संवाद बहाल करने की अपील करते हुए लिखे गए खुले पत्र पर मेजर जनरल ध्रुव सी कटोच (सेवानिवृत्त) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे पत्र पहले भी लिखे जाते रहे हैं लेकिन इनसे कोई ठोस परिणाम निकलने की संभावना नहीं है।

मेजर जनरल ध्रुव सी कटोच ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले लोग दोनों देशों की सरकारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते। उन्होंने कहा, “भारत की तरफ से और पाकिस्तान की तरफ से कुछ लोग हैं।

पाकिस्तान की तरफ से कुछ रिटायर्ड लोग हैं, लेकिन पाकिस्तान सरकार की तरफ से कोई नुमाइंदा नहीं है। और न ही भारत सरकार की तरफ से कोई नुमाइंदा है। यह सिविल सोसाइटी के कुछ लोग हैं, जो पहले भी इस प्रकार के पत्र लिखते रहे हैं।
इन लोगों को भी यह मालूम है कि इस तरह के खुले पत्र लिखने से न तो कोई ठोस बदलाव आने वाला है और न ही पाकिस्तान अपनी मौजूदा नीति में परिवर्तन करेगा।”

कटोच ने कहा कि अगर पाकिस्तान अपना एटीट्यूड चेंज नहीं करेगा और वह टेररिज्म के साथ चलता रहेगा, जैसा कि हमने पिछले 30-40 वर्षों में देखा है, तो इस चिट्ठी को लिखने से क्या फायदा है? उन्हें नहीं लगता कि भारत सरकार इस पत्र पर कोई विशेष ध्यान देगी।

पत्र लिखने वालों की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इनका मकसद शांति लाना है। इनका कुछ और मकसद है। ये किसी दूसरे के कहने पर इस प्रकार की हरकत कर रहे हैं। हो सकता है अमेरिका इसके पीछे हो या कोई और हो।

भारत-पाकिस्तान संबंधों पर मेजर जनरल कटोच ने कहा कि यदि वास्तव में दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करनी है, तो बातचीत शुरू करने से पहले पाकिस्तान को दो अहम कदम उठाने होंगे। पहला, पाकिस्तान को आतंकवाद का रास्ता छोड़ना पड़ेगा।

दूसरा, जो आतंकवादी इस समय उनके पास हैं, जैसे हफीज सईद आदि, उन्हें भारत को सौंपना होगा। यही पहला कदम होगा। उसके बाद ही आगे कुछ हो सकता है। लेकिन जब तक यह नहीं होगा, तब तक बाकी किसी भी बातचीत का कोई मतलब नहीं है।”
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