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Friday, July 3, 2026
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दिल्ली दवा घोटाले में आप का आरोप, 103 करोड़ एक्स-रे घोटाला!

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने जिन पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद की, उनकी बाजार कीमत लगभग 10 लाख रुपये प्रति मशीन है| 

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दिल्ली की राजनीति में कथित “दिल्ली दवा घोटाले” को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने रेखा गुप्ता सरकार पर एक्स-रे मशीनों की खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने 448 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद में करीब 103 करोड़ रुपये का घोटाला किया है।

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने जिन पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद की, उनकी बाजार कीमत लगभग 10 लाख रुपये प्रति मशीन है, लेकिन इन्हें सरकार ने करीब 33 लाख रुपये प्रति मशीन की दर से खरीदा। उनके मुताबिक, इस तरह 448 मशीनों की खरीद पर सरकार ने लगभग 148 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि इनकी वास्तविक कीमत करीब 45 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी।

उनका दावा है कि दोनों रकम के बीच का लगभग 103 करोड़ रुपये का अंतर कमीशनखोरी का परिणाम है। आप नेता ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में राजीव रंगीला नाम के व्यक्ति की अहम भूमिका रही। उन्होंने दावा किया कि राजीव रंगीला ने एफ-मेड डिवाइसेस नाम से कंपनी बनाकर एक बड़ी पोर्टेबल एक्स-रे मशीन निर्माता कंपनी की डिस्ट्रीब्यूटरशिप हासिल की और उसी के जरिए दिल्ली सरकार को मशीनें ऊंची कीमत पर बेची गईं।

सौरभ भारद्वाज के अनुसार, सरकार को पहले से जानकारी थी कि उसे करीब 450 से 500 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की आवश्यकता है। इसके बावजूद सरकारी पोर्टल पर केवल दो मशीनों की खरीद का टेंडर जारी किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तें और तकनीकी मानक इस तरह तैयार किए गए कि केवल एक विशेष कंपनी ही पात्र साबित हो सके। परिणामस्वरूप, किसी अन्य कंपनी ने टेंडर में भाग नहीं लिया और संबंधित कंपनी को ठेका मिल गया।

उन्होंने दावा किया कि औपचारिक रूप से दो मशीनों के लिए जारी किए गए टेंडर के बाद पर्दे के पीछे उसी कंपनी से 448 मशीनों की खरीद कर ली गई। उनके अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है और इससे सरकारी खरीद प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

सौरभ भारद्वाज ने इस पूरे मामले को “एक्स-रे मशीन घोटाला” बताते हुए आरोप लगाया कि सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है और दिल्ली के लोगों के टैक्स के पैसे की बड़े स्तर पर बर्बादी हुई है। उन्होंने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने तथा पूरे खरीद प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की।

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