मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने पहाड़ियों के संरक्षण को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पेरायुर के पास ओनन कराडु पहाड़ी पर अवैध पत्थर खनन रोकने की याचिका पर सुनवाई करते हुए तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि सरकार शराब की दुकानों की सुरक्षा को लेकर जितनी तत्परता दिखाती है, उतनी संवेदनशीलता प्राकृतिक पहाड़ियों को बचाने में क्यों नहीं नजर आती?
नम्मलवार नेचर कंजर्वेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष पेथथानन ने मदुरै बेंच के सामने एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि सलुप्पेन कराडु, ओनन कराडु और पेरुमल मलाई पहाड़ियां पेरायुर इलाके में शंकरलिंगपुरम गांवों के पास स्थित हैं।
इनमें से ओनन कराडु ऐतिहासिक महत्व वाली पहाड़ी है। इस पहाड़ी पर कई पुरातात्विक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अवशेष मौजूद हैं, जो प्राचीन काल में रहने वाले लोगों के रहन-सहन और दफनाने की प्रथाओं के सबूत देते हैं। यह पहाड़ी प्राकृतिक जल संग्रह और भूजल पुनर्भरण प्रणाली के रूप में भी काम करती है।
ऐसे हालात में पहाड़ी पर पत्थर की खदान चलाने की अनुमति दे दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि खदान की गतिविधियों से सभी प्राचीन अवशेष नष्ट हो जाएंगे। इसलिए, उन्होंने ओनन कराडु पहाड़ी पर खदान की गतिविधियों को रोकने का आदेश मांगा, क्योंकि यह पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व की है और यहां जैव-विविधता भी समृद्ध है।
मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस वेलमुरुगन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की बेंच ने सवाल किया, “सरकार शराब की दुकानों की सुरक्षा को लेकर तो चिंता दिखाती है, लेकिन पहाड़ियों की सुरक्षा को लेकर क्यों नहीं? ऐसी प्राकृतिक संरचनाओं को दोबारा नहीं बनाया जा सकता। अगर हम इनके प्रति बेपरवाह रहे तो क्या होगा?”
जजों ने राज्य सरकार को मामले में विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और सुनवाई तीन हफ्ते के लिए टाल दी।



