रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिणी राज्यों में टमाटर की खेती का रकबा कम होने के कारण उत्पादन घटने से टमाटर की कीमतों में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
दूसरी तरफ वैश्विक आपूर्ति संबंधी दबावों के चलते वनस्पति तेल और लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलेंडरों की कीमतों में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
क्रिसिल इंटेलिजेंस के पुष्पन शर्मा ने कहा, “टमाटर, वनस्पति तेल और एलपीजी सिलेंडरों के महंगे होने के कारण अप्रैल में घर पर बने शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के थालियों की लागत में पिछले वर्ष की तुलना में 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।”
क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में टमाटर की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं और जुलाई-अगस्त में इनमें और वृद्धि हो सकती है।
इसकी वजह गर्मियों की सीजन में कम बुआई, किसानों के बीच कीमतों को लेकर कमजोर धारणा और उत्तरी भारत के प्रमुख टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में लू चलने की संभावना को बताया।
रिपोर्ट में प्याज और आलू की कीमतों को लेकर भी चिंता जताई गई है। इस वर्ष रबी फसल के उत्पादन में अनुमानित 4-6 प्रतिशत की गिरावट के कारण प्याज की कीमतें ऊंची रहने की उम्मीद है।
आलू की कटाई का मौसम समाप्त होने और कोल्ड स्टोरेज से भंडारित आपूर्ति बाजार में आने के साथ ही आलू की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण वनस्पति तेल की कीमतें निकट भविष्य में स्थिर रहने की संभावना है, जिससे वैश्विक आपूर्ति की स्थिति प्रभावित हुई है।
हालांकि, रिपोर्ट में दालों की कीमतों को लेकर कुछ राहत दी गई है। क्रिसिल ने कहा कि पर्याप्त आपूर्ति और कम मांग के कारण दालों की कीमतें नरम रहने की उम्मीद है।
इसमें यह भी कहा गया है कि अनुकूल आयात, सरकारी बफर स्टॉक की रिलीज और घरेलू आवक में स्थिरता के कारण घरेलू उत्पादन के स्तर में कमी के बावजूद बाजारों में आपूर्ति अच्छी बनी रहने की संभावना है।
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