अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी युद्ध सचिव (Secretary of War) पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिकी सेना ईरान को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के किसी भी आदेश को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। दौरान अमेरिका का एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है। गुरुवार (29 जनवरी)को हुई एक कैबिनेट बैठक में हेगसेथ ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी। ईरान लगातार यह कहता रहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा है। बैठक के दौरान हेगसेथ ने कहा, “हम इस राष्ट्रपति से युद्ध विभाग जो भी अपेक्षा करता है, उसे पूरा करने के लिए तैयार रहेंगे।”
हेगसेथ ने हाल ही में वेनेजुएला में हुए अमेरिकी ऑपरेशन का भी उल्लेख किया, जिसमें वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़े जाने की याद दिलाई गई। उन्होंने इसे अमेरिकी क्षमता और इरादे का उदाहरण बताते हुए कहा, “यह दुनिया की हर राजधानी को संदेश देता है कि जब राष्ट्रपति ट्रम्प बोलते हैं, तो वह गंभीर होते हैं।”
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मध्य पूर्व में की जा रही नौसैनिक तैनाती को “विशाल” और “खूबसूरत आर्माडा” बताया है। इस बेड़े का नेतृत्व विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln कर रहा है और बताया जा रहा है कि यह वेनेजुएला के लिए भेजे गए बेड़े से भी बड़ा है। जहाज़ों और विमानों की ट्रैकिंग से संकेत मिलता है कि कई गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक स्वेज नहर से गुजर चुके हैं और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास तैनात हैं, जबकि निगरानी विमान भी क्षेत्र में सक्रिय हैं।
ट्रम्प ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा, “इस समय बहुत सारे बहुत बड़े, बहुत शक्तिशाली जहाज़ ईरान की ओर जा रहे हैं, और यह बहुत अच्छा होगा अगर हमें उनका इस्तेमाल न करना पड़े।”
हालांकि सैन्य दबाव के साथ-साथ ट्रम्प ने कूटनीति की संभावना भी जताई। उन्होंने कहा कि वह ईरानी नेताओं से बात करने की योजना बना रहे हैं और तहरान के सामने दो मांगें रखीं, नंबर एक, कोई परमाणु नहीं। और नंबर दो, प्रदर्शनकारियों को मारना बंद करो।
इस बीच, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी सैन्य योजना सक्रिय है। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ट्रम्प प्रशासन ईरानी सुरक्षा बलों और परमाणु ठिकानों पर हमलों से लेकर अधिकारियों को निशाना बनाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को फिर से भड़काना हो सकता है।
इसी सप्ताह सीनेट में गवाही देते हुए विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया कि यदि अमेरिकी या सहयोगी सैनिकों को खतरा महसूस हुआ तो अमेरिकी सेना ईरान पर पूर्व-आक्रमण कर सकती है। उन्होंने ईरान को अब तक का सबसे कमजोर देश बताया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि वहां सत्ता परिवर्तन वेनेजुएला की तुलना में कहीं अधिक जटिल होगा।
ईरान ने अमेरिकी बयानों पर कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के एक उप विदेश मंत्री ने कहा कि देश 200 प्रतिशत अपनी रक्षा के लिए तैयार है और किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब अनुपात से परे होगा, जिसमें क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने कहा है कि वह संवाद के लिए तैयार है, लेकिन अगर दबाव डाला गया तो वह पहले जैसा कभी नहीं दिया, वैसा जवाब देगा।
यह भी पढ़ें:
आर्थिक सर्वेक्षण में मजबूत अर्थव्यवस्था, भारत ग्लोबल ब्राइट स्पॉट
वित्त वर्ष 2026 में दिसंबर तक खुले 2.35 करोड़ नए डीमैट खाते: आर्थिक सर्वेक्षण!



