चटगांव में, अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और चटगांव सिटी अवामी लीग की वार्ड नंबर-24 (नॉर्थ अग्राबाद) इकाई के उपाध्यक्ष अब्दुर रहमान मिया (70) की जेल हिरासत में मौत हो गई। उन्हें करीब तीन महीने पहले हिरासत में लिया गया था। परिवार के सदस्यों का आरोप है कि फेफड़ों के अंतिम चरण के कैंसर और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित होने के बावजूद उन्हें जमानत और समुचित चिकित्सा उपचार से वंचित रखा गया।
बांग्लादेश के प्रमुख मीडिया आउटलेट ‘द डेली रिपब्लिक’ के अनुसार, अब्दुर रहमान मिया को 17 नवंबर 2025 को उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वे नमाज अदा करने के लिए घर से निकल रहे थे। परिजनों का कहना है कि उस समय उनकी हालत बेहद गंभीर थी और वे ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे।
पुलिस ने उन्हें कोतवाली थाना क्षेत्र में दर्ज एक मामले में हिरासत में लिया था, जिसमें कथित तौर पर विस्फोटकों से जुड़ा आरोप शामिल था। परिवार का आरोप है कि गिरफ्तारी के समय मिया को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जरूरत थी, लेकिन उनकी अपीलों को नजरअंदाज कर दिया गया।
करीब तीन महीने तक हिरासत में रहने के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और अंततः उनकी जेल में मौत हो गई। इसके बाद अवामी लीग नेताओं ने आरोप लगाया कि जमानत और चिकित्सा सुविधा न देना हिरासत में लापरवाही का मामला है। हालांकि, अब तक अधिकारियों की ओर से उनकी मौत की परिस्थितियों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
दूसरी ओर, नरसिंदी जिले में एक अलग घटना में, अवामी लीग की छात्र इकाई छत्र लीग के पूर्व नेता अजीमुल कादेर भुइयां (45) का क्षत-विक्षत शव एक खाई से बरामद किया गया। वे पिछले तीन दिनों से लापता थे। अजीमुल पेशे से पोल्ट्री व्यवसायी थे और बेलाबो उपजिला के बाजनाब यूनियन स्थित बीर बागबेर गांव के निवासी थे। वे दिवंगत मन्नान भुइयां के पुत्र थे।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अजीमुल यूनियन छत्र लीग के महासचिव और उपजिला इकाई के संयुक्त महासचिव रह चुके थे। उन्हें जमीनी स्तर का संगठनकर्ता माना जाता था, न कि कोई बड़ा राजनीतिक चेहरा। उनके लापता होने और फिर हत्या की खबर से अवामी लीग समर्थकों में भारी आक्रोश है। पार्टी का आरोप है कि यह हत्या राजनीतिक रूप से प्रेरित थी।
अवामी लीग नेताओं ने दावा किया कि इस हत्या में जमात-ए-इस्लामी से जुड़े कार्यकर्ताओं की भूमिका हो सकती है और अंतरिम प्रशासन पर दोषियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। हालांकि, कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अभी किसी राजनीतिक साजिश की पुष्टि नहीं की है और कहा है कि मामले की जांच जारी है।
इन दोनों मौतों के बाद सरकार बदलने के बाद से अवामी लीग समर्थकों के खिलाफ कथित मनमानी गिरफ्तारियों, हिरासत में मौतों और लक्षित हमलों को लेकर विपक्ष द्वारा उठाई जा रही चिंताएं और गहरी हो गई हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी दोनों मामलों में स्वतंत्र जांच की मांग की है, ताकि जवाबदेही तय हो सके और कानून के शासन को सुनिश्चित किया जा सके।
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