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Monday, April 22, 2024
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Abu Dhabi: अबू धाबी के हिंदू मंदिर में ड्रेस कोड लागू, दिशानिर्देश जारी!

यह BAPS मंदिर 1 मार्च से सोमवार को छोड़कर हर दिन सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक जनता के लिए खुला रहेगा। अब मंदिर में दर्शन के लिए रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी, लेकिन मंदिर जाने वालों को कई नियमों का ध्यान रखना होगा।

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संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में हिंदू मंदिर का उद्घाटन पिछले महीने एक भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। अब इस मंदिर में प्रवेश के लिए ड्रेस कोड लागू किया गया है। शुक्रवार 1 मार्च से मंदिर सभी के लिए खोल दिया गया है। यह BAPS मंदिर 1 मार्च से सोमवार को छोड़कर हर दिन सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक जनता के लिए खुला रहेगा। अब मंदिर में दर्शन के लिए रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी, लेकिन मंदिर जाने वालों को कई नियमों का ध्यान रखना होगा।

मंदिर में प्रवेश के लिए ड्रेस कोड जरूरी: मंदिर ने सभी धर्मों और सम्प्रदायों के लोगों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। भक्तों की सहायता के लिए बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के स्वयंसेवक और कर्मचारी मंदिर में मौजूद रहेंगे। मंदिर में प्रवेश के लिए एक ड्रेस कोड आवश्यक है। मंदिर पर्यटकों को कंधे और घुटनों को ढकने वाले कपड़े पहनने की सलाह देता है। कपड़ों पर आपत्तिजनक डिज़ाइन और नारे नहीं लिखे होने चाहिए।

मंदिर जाने वालों को याद रखना होगा नियम: 14 फरवरी को मंदिर के उद्घाटन के बाद यानी 15 से 29 फरवरी तक केवल पहले से पंजीकृत भक्तों को ही दर्शन की अनुमति थी। इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही, परिसर की पवित्रता बनाए रखने के लिए पारदर्शी, पारभासी या टाइट-फिटिंग कपड़े भी प्रतिबंधित हैं। यदि आगंतुक इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं करते हैं और कर्मचारी किसी की पोशाक को अनुचित मानते हैं, तो उन्हें प्रवेश से वंचित किया जा सकता है।

बच्चों के साथ एक वयस्क होना जरूरी: इस मंदिर में बच्चों को अकेले जाने की अनुमति नहीं है। मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए बच्चों के साथ एक वयस्क भी होना चाहिए। मंदिर परिसर के अंदर बैग, बैकपैक और केबिन सामान की अनुमति नहीं है। मंदिर के अंदर हथियार और धारदार वस्तुएं, चाकू, लाइटर और माचिस की भी अनुमति नहीं है। पार्किंग क्षेत्र सहित पूरे मंदिर परिसर में धूम्रपान, शराब और तंबाकू उत्पादों का सेवन सख्त वर्जित है।

मोबाइल फोन का उपयोग मंदिर के बाहर किया जा सकता है, लेकिन मंदिर के अंदर यह सख्त वर्जित है। पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे मंदिर में पत्थर की नक्काशी, आभूषण, पेंटिंग या सुरक्षात्मक आवरण को न छूएं। भक्तों को मंदिर की दीवारों पर लिखने और चित्र बनाने की सख्त मनाही है।

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