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Friday, January 9, 2026
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अभी तो सारा आसमां बाकी है 

उनका व्यवहार शत-प्रतिशत पेशेवर होता है, लेकिन उसमें कभी भी कठोरता महसूस नहीं होती।

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आयडीबीआय बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राकेश शर्मा बैंकिंग क्षेत्र में अनुभव का एक बड़ा खजाना समेटे हुए हैं। 40 साल से अधिक के उनके इस सफर की शुरुआत भारतीय स्टेट बैंक से हुई थी। मैं उनसे काम के सिलसिले में कई बार मिला हूं। कभी-कभी कार्यक्रमों में भी मुलाकात हुई है।

वे कम बोलते हैं। जो कुछ भी बोलते हैं, वह पूरी तरह से काम से संबंधित होता है। उनका व्यवहार शत-प्रतिशत पेशेवर होता है, लेकिन उसमें कभी भी कठोरता महसूस नहीं होती। उनमें अद्भुत सौम्यता है, सामने वाले को आश्वस्त करने वाला एक खास रसायन है, जिससे एक बार मिलने वाला व्यक्ति उनसे दोबारा मिलना चाहता है। उनका आकर्षण बहुत मजबूत है। मुझे तो हर मुलाकात में यह महसूस हुआ है।

नए प्रयोगों का सफर

एसबीआई में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम करने के बाद, उन्होंने सुरक्षित करियर को अलविदा कह दिया। कुछ नया प्रयोग करने की तीव्र इच्छा के कारण उन्होंने लक्ष्मी विलास बैंक के एमडी और सीईओ का पदभार संभाला। यहीं से प्रयोगों का सिलसिला शुरू हुआ। एक जगह जाना, किले को मजबूत करना और फिर आगे बढ़ना।

लक्ष्मी विलास बैंक में लगभग डेढ़ साल काम करने के बाद, सितंबर 2015 में उन्होंने केनरा बैंक के एमडी और सीईओ का कार्यभार संभाला। वहां जुलाई 2018 में तीन साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद उन्होंने एक और बड़ी छलांग लगाई। तब तक उन्हें ‘लंबी छलांग’ की आदत हो गई थी। उनकी हर ‘छलांग’ यानी निर्णय सफल रहा।

आयडीबीआय बैंक में नई ऊंचाइयों की ओर

अक्टूबर 2018 से आयडीबीआय बैंक के एमडी और सीईओ की बागडोर उनके हाथ में आई। यह एक बड़ी चुनौती थी। बैंक को एक नई ऊंचाई पर ले जाने और उसकी प्रगति के लिए शर्मा के प्रयास शुरू हुए। अनुभव का उपयोग कर बैंक को और अधिक सक्षम बनाने के लिए उन्होंने उपाय शुरू किए।

ग्राहक सेवा को और अधिक सहज, सरल और सुव्यवस्थित बनाने पर उन्होंने जोर दिया। तकनीक का उपयोग करते समय ग्राहकों के लिए भी इसका उपयोग करना आसान होना चाहिए,’ यह दृष्टिकोण उन्होंने तकनीकी टीम को दिया। उन्होंने बैंक को वित्तीय स्थिरता दिलाने का काम शुरू किया।

आईडीबीआई बैंक में निरंतर नेतृत्व

राकेश शर्मा ने जुलाई 2018 में आईडीबीआई (IDBI) बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पदभार संभाला था| 19 मार्च 2025 को, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने उन्हें उसी पद पर तीन साल के लिए फिर से नियुक्त किया है| राकेश शर्मा वर्तमान में 67 वर्ष के हैं, और केंद्र सरकार ने उन पर एक बार फिर से विश्वास जताया है|

यह निश्चित है कि आईडीबीआई में उनका कार्यकाल दस साल से अधिक होगा| हम दृढ़ता से कह सकते हैं कि उन्हें जो इतना लंबा अवसर मिला है, उसका उन्होंने सदुपयोग किया है और आईडीबीआई को बड़ा बनाया है|

एक बैंकर से कहीं बढ़कर

आपकी की पहचान एक बैंकर के रूप में है। लेकिन उन्हें जानने वाले जानते हैं कि यह उनके व्यक्तित्व का एक छोटा सा पहलू है। कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था, वित्त, लघु उद्योग, प्रशासन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस जैसे विभिन्न विषयों में उनकी रुचि है। इन क्षेत्रों का उन्हें गहन अध्ययन भी है। इन सभी विषयों के बारे में उनका नियमित पठन जारी रहता है। दुनिया भर में इन क्षेत्रों में क्या हो रहा है, इस पर उनकी बारीक नजर रहती है।

परिणाम और भविष्य की संभावनाएं

आयडीबीआय में शामिल होने के बाद उन्होंने जो भी प्रयास किए, उसके दृश्य परिणाम अब दिखने लगे हैं। प्रौद्योगिकी पर जोर देने के उनके दृष्टिकोण का बैंक को फायदा हो रहा है। ग्राहकों को आधुनिक और प्रभावी सेवाएं देना संभव हो रहा है। पूरे करियर में, उन्होंने पारदर्शिता, नैतिक मूल्यों और मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस को प्राथमिकता दी है।

आयडीबीआय बैंक के शानदार भविष्य को लेकर वे सिर्फ आशावादी ही नहीं, बल्कि उन्हें दृढ़ आत्मविश्वास भी है। अभी तो उन्होंने शुरुआत की है। मेरे जैसे शुभचिंतकों की उन्हें शुभकामनाएं भी हैं। ‘अभी तो लांघा है समंदर उसने, अभी पूरा आसमान बाकी है।’

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