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भू-राजनीतिक तनाव के बीच इस हफ्ते सोने की कीमतों में आई 0.19 प्रतिशत की तेजी!

फिलहाल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर गोल्ड फ्यूचर्स 1,58,588 रुपए पर और सिल्वर फ्यूचर्स 2,71,600 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था।

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लगातार बने भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बीच इस सप्ताह सोने की कीमतों में 0.19 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। शुक्रवार को एमसीएक्स गोल्ड जून फ्यूचर्स में 0.06 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि एमसीएक्स सिल्वर मई फ्यूचर्स 0.09 प्रतिशत कमजोर हुआ।

फिलहाल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर गोल्ड फ्यूचर्स 1,58,588 रुपए पर और सिल्वर फ्यूचर्स 2,71,600 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को 999 प्यूरिटी वाले सोने के 10 ग्राम की कीमत 1,58,117 रुपए रही, जो सोमवार को बाजार खुलने के समय 1,57,821 रुपए थी।

विश्लेषकों के अनुसार, सप्ताह के अंत में सोने की कीमतों में हल्की कमजोरी देखने को मिली, क्योंकि कॉमेक्स गोल्ड 4,535 डॉलर के आसपास स्थिर हुआ और रुपए में मजबूती आने से घरेलू बाजार में बुलियन कीमतों पर दबाव बढ़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति की खबरों से कीमती धातुओं की खरीदारी में थोड़ी नरमी आई। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव ने निकट अवधि में सोने को समर्थन दिया।

विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिका-ईरान वार्ता से जुड़े सकारात्मक संकेतों के चलते कॉमेक्स गोल्ड को 4,500 डॉलर के स्तर के आसपास सपोर्ट मिल रहा है, लेकिन अंतिम नतीजे को लेकर अनिश्चितता अभी भी बाजार में उतार-चढ़ाव बनाए हुए है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2026 कैलेंडर वर्ष में सोने की मांग सालाना आधार पर 10 प्रतिशत या 50-60 टन तक घट सकती है। इसकी बड़ी वजह आयात शुल्क में बढ़ोतरी को माना जा रहा है।

सरकार ने सोने पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है, जो अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। इससे जुलाई 2024 में की गई शुल्क कटौती पूरी तरह खत्म हो गई है।

आगे चलकर सोने की कीमतों की दिशा अमेरिका-ईरान संबंधों, डॉलर इंडेक्स की चाल और रुपए में उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी।

विश्लेषकों के अनुसार, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी निकट अवधि में सोने और चांदी के लिए दबाव पैदा कर सकती है। अमेरिका के 30 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है, जबकि 10 साल के बॉन्ड की यील्ड सप्ताह के अंत में 4.5 प्रतिशत से अधिक रही।

बढ़ती बॉन्ड यील्ड के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व 2026 के अंत तक ब्याज दरें बढ़ा सकता है। इससे सोना और चांदी जैसे बिना ब्याज वाले निवेश साधनों को रखने की लागत बढ़ सकती है।

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