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खार्ग के अलावा ईरान के लारक, अबू मूसा और केशम द्वीपों पर अमेरिकी नजर

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ईरान युद्ध के बढ़ते दायरे के बीच अब खार्ग द्वीप के अलावा फारस की खाड़ी के लारक, अबू मूसा और केशम पर भी अमेरिका नजरें गढ़ाकर बैठा है। ये सभी द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित हैं, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग माना जाता है।

खार्ग द्वीप ईरान के तट से लगभग 25 किलोमीटर दूर है, जहां से ईरान के 90 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल निर्यात होता  है। डोनाल्ड ट्रंप पहले से ही इस द्वीप को कब्जाने की मंशा जाहिर कर चुके हैं और वहां अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की संभावना पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, रणनीतिक दृष्टि से अन्य द्वीप भी उतने ही महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

लारक द्वीप: निगरानी और सैन्य ठिकानों का केंद्र

लारक द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे संकरे हिस्से पर स्थित है। यहां ईरान के कई सैन्य ठिकाने, रडार सिस्टम और बंकर मौजूद हैं, जिनसे समुद्री जहाजों की निगरानी की जाती है। यह द्वीप ईरान की तेल संरचना के लिए भी अहम है और भारी किलेबंदी के कारण इसे कब्जे में लेना आसान नहीं होगा।

अबू मूसा और टुंब द्वीप: शिपिंग लेन पर नियंत्रण

अबू मूसा, ग्रेटर टुंब और लेसर टुंब द्वीप फारस की खाड़ी के प्रवेश द्वार पर स्थित हैं। इनकी स्थिति ऐसी है कि यहां से खाड़ी से बाहर निकलने वाले जहाजों पर नजर रखी जा सकती है। Abu Musa के आसपास तेल और गैस संसाधन भी मौजूद हैं, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। ईरान 1971 से इन द्वीपों पर नियंत्रण बनाए हुए है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात इन पर अपना दावा करता है।

केशम द्वीप: सैन्य क्षमता का मजबूत केंद्र

तीर जैसे आकार वाला केशम द्वीप अब एक प्रमुख सैन्य अड्डे में बदल चुका है। यहां एंटी-शिप मिसाइल, ड्रोन, बारूदी सुरंगें और भूमिगत सुरंगों में रखे हथियार मौजूद हैं। यह द्वीप होर्मुज क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अमेरिका की रणनीति और सैन्य तैयारी

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग इन द्वीपों पर कार्रवाई के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें खार्ग द्वीप पर कब्जा, लारक पर नियंत्रण, अबू मूसा और टुंब द्वीपों पर सैन्य अभियान और ईरानी तेल निर्यात को रोकना शामिल है।

अमेरिका ने क्षेत्र में बड़ी संख्या में सैनिक और नौसैनिक संसाधन तैनात किए हैं। 82nd एयरबोर्न डिवीजन के पैराट्रूपर्स और मरीन यूनिट्स को संभावित अभियान के लिए तैयार रखा गया है, जो तेजी से किसी भी रणनीतिक स्थान पर कब्जा करने में सक्षम हैं।

ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उसके किसी भी द्वीप पर कब्जा करने की कोशिश की गई, तो वह कड़ा जवाब देगा। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने चेतावनी दी है कि “अगर कोई कार्रवाई होती है, तो क्षेत्रीय देशों के महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाया जाएगा।”

विशेषज्ञों के अनुसार, ये द्वीप न केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन पर किसी भी तरह की कार्रवाई से क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक बाजार दोनों पर गहरा असर पड़ सकता है।

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