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Thursday, April 16, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1200 अंक लुढ़का; कारण जानिए! 

कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1,200 अंक यानी 1.6 प्रतिशत टूटकर 72,326.54 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया।

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सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। दोनों प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी50 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ खुले।

कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1,200 अंक यानी 1.6 प्रतिशत टूटकर 72,326.54 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 करीब 350 अंक यानी 1.5 प्रतिशत गिरकर 22,453 के इंट्रा-डे लो पर आ गया। इस दौरान, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

इस तेज गिरावट के चलते कुछ ही घंटों में निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 422.04 लाख करोड़ रुपए (शुक्रवार) से घटकर 416.06 लाख करोड़ रुपए रह गया (दोपहर 12.30 बजे तक)।

बाजार में इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिका-ईरान युद्ध है, जो एक महीने से ज्यादा समय से जारी है और अपने पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर गया है। इस युद्ध के खत्म होने को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का फैसला बढ़ाया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। इस बीच यमन के हूती विद्रोहियों के शामिल होने से तनाव और बढ़ गया है।

दूसरा बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्ते पर असर के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, अपनी 85-90 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है; ऐसे में महंगा तेल अर्थव्यवस्था पर दबाव डालता है।

तीसरा कारण बाजार में बढ़ती अस्थिरता है। वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 28.1 के पार पहुंच गया, जो यह दिखाता है कि निवेशकों में डर और अनिश्चितता बढ़ रही है। आमतौर पर 12-15 का स्तर सामान्य माना जाता है, लेकिन इससे ऊपर जाने पर बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका रहती है।

चौथा बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में 27 तारीख तक भारतीय बाजार से 1.23 लाख करोड़ रुपए निकाल लिए हैं। इससे बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है।

पांचवां कारण एफएंडओ (फ्यूचर्स और ऑप्शंस) कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी है। 30 मार्च को मार्च सीरीज के कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो रहे हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी कारणों के चलते फिलहाल बाजार में कमजोरी बनी रह सकती है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

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