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अपोजी एयरोस्पेस का ऑस्ट्रेलिया की AAI से ₹3,500 करोड़ का बड़ा रक्षा सौदा

15 अल्बाट्रॉस 2.0 उभयचर विमानों की आपूर्ति और MRO शामिल

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तेलंगाना स्थित अपोजी एयरोस्पेस ने ऑस्ट्रेलिया की एम्फीबियन एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ (AAI) के साथ ₹3,500 करोड़ (करीब 390 मिलियन डॉलर) का एक अहम रक्षा और एयरोस्पेस समझौता हासिल किया है। इस करार के तहत 15 अल्बाट्रॉस 2.0 उभयचर विमानों की खरीद के साथ-साथ उनके स्थानीय रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) की व्यवस्था शामिल है। यह सौदा भारत के रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें निजी क्षेत्र की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

अल्बाट्रॉस 2.0 एक उन्नत मल्टी-रोल उभयचर विमान है, जिसे समुद्र में निगरानी, खोज एवं बचाव (SAR), आपदा राहत और सैनिकों के परिवहन जैसे विविध अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है। यह विमान जमीन और पानी दोनों पर उतरने में सक्षम है। इसमें अत्याधुनिक एवियोनिक्स, 10 घंटे से अधिक की फ्लाइट क्षमता और 2,500 किलोग्राम से अधिक पेलोड क्षमता जैसी विशेषताएं हैं, जो इसे भारत की भौगोलिक और परिचालन आवश्यकताओं, खासकर तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बनाती हैं।

हैदराबाद मुख्यालय वाली अपोजी एयरोस्पेस रक्षा क्षेत्र में उभरती हुई एक प्रमुख निजी कंपनी है। एयरोस्पेस कंपोनेंट्स में विशेषज्ञता रखने वाली यह कंपनी अब पूर्ण विमान असेंबली की ओर विस्तार कर रही है। वैश्विक ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) के साथ सहयोग का अनुभव रखने वाली अपोजी के लिए यह करार जटिल MRO कार्यक्रमों को संभालने की उसकी क्षमता निर्माण करेगा। कंपनी के अनुसार, तेलंगाना में प्रस्तावित स्थानीय सुविधाओं से 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।

ऑस्ट्रेलिया की एम्फीबियन एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ यानी AAI उभयचर विमानन के क्षेत्र में अग्रणी मानी जाती है। इसने तकनीकी क्षमताओं और लागत दक्षता के कड़े मूल्यांकन के बाद अपोजी का चयन किया। दोनों कंपनियों के बीच साझेदारी ऑस्ट्रेलिया की इंडो-पैसिफिक रणनीति के अनुरूप है और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर साझा चिंताओं के बीच भारत के साथ रक्षा संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है। डिलीवरी 36 महीनों के भीतर शुरू होने की संभावना है, जिसमें शुरुआती खेप भारतीय तटरक्षक बल के एकीकरण को प्राथमिकता देगी।

इस करार का एक प्रमुख स्तंभ स्थानीय MRO प्रावधान है, जिसके तहत तकनीक हस्तांतरण और लाइफसाइकल सप्पोर्ट शामिल होगा। हैदराबाद के पास अपोजी की प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सुविधा में करीब 80 प्रतिशत रखरखाव स्वदेशी स्तर पर किया जाएगा, जिससे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम होगी और टर्नअराउंड समय घटेगा।

वित्तीय दृष्टि से, इस सौदे में प्रत्येक अल्बाट्रॉस 2.0 विमान की अनुमानित लागत लगभग ₹233 करोड़ बताई गई है, जिसमें उष्णकटिबंधीय परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलन और भारतीय नियामक अनुपालन शामिल हैं। यह करार भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने जा रहें।

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