शारदीय नवरात्रि में अष्टमी-नवमी हवन का है विशेष महत्व!

अष्टमी या नवमी को व्रत का पारण करने वाले भक्त हवन करते हैं। हवन और कन्या पूजन के साथ नवरात्रि का व्रत पूर्ण फलदायी माना जाता है।

शारदीय नवरात्रि में अष्टमी-नवमी हवन का है विशेष महत्व!

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शारदीय नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इसे देवी दुर्गा की उपासना का उत्सव माना जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि में श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर मां दुर्गा भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इस दौरान व्रत, पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और हवन का विशेष महत्व होता है।

धार्मिक परंपरा के अनुसार नवरात्रि में प्रतिदिन हवन किया जा सकता है, लेकिन अष्टमी और नवमी को किए गए हवन का महत्व सबसे अधिक होता है। इस बार अष्टमी 30 सितंबर और महानवमी 1 अक्टूबर को पड़ रही है।अष्टमी या नवमी को व्रत का पारण करने वाले भक्त हवन करते हैं। हवन और कन्या पूजन के साथ नवरात्रि का व्रत पूर्ण फलदायी माना जाता है।

हवन से पहले स्थान को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है। आटे से रंगोली बनाकर उस पर हवन कुंड स्थापित किया जाता है और उसके चारों ओर कलावा बांधकर पूजन किया जाता है। स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर भक्त पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठते हैं। जल, चावल और फूल लेकर संकल्प किया जाता है। हवन कुंड में आम की लकड़ी रखकर कपूर से अग्नि प्रज्वलित की जाती है और उसमें घी डालकर अग्नि स्थिर की जाती है।

आचमन के बाद गणेश जी का ध्यान कर “ॐ गणेशाय नमः स्वाहा” मंत्र से आहुति दी जाती है। इसके बाद नवग्रहों और मां दुर्गा के मंत्रों का उच्चारण कर आहुति दी जाती है।

अष्टमी के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: 04:37 से 05:25
अभिजीत मुहूर्त: 11:47 से 12:35
विजय मुहूर्त: 02:10 से 02:58

नवमी के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: 04:37 से 05:26
विजय मुहूर्त: 02:09 से 02:57
रवि योग: 08:06 से 06:15 (2 अक्टूबर तक)

इन मुहूर्तों में किया गया हवन और पूजन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

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