रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल साइमन स्टुअर्ट की यह भारत यात्रा न केवल भारत की क्षेत्रीय भूमिका को मान्यता देती है, बल्कि इंडो-पैसिफिक में सामूहिक तैयारी और रणनीतिक विश्वास को गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह यात्रा दोनों सेनाओं के बीच सहयोग के अगले चरण की नींव रखेगी।
दरअसल, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा साझेदारी निरंतर विकसित हो रही है। इसे नियमित उच्च स्तरीय संवादों और संस्थागत ढांचे के माध्यम से मजबूती मिल रही है।
भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई सेनाओं के बीच सहयोग भी अब इस साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है। दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यासों की संख्या, स्तर और रणनीतिक महत्व में लगातार वृद्धि हो रही है।
भारतीय सेना ने ऑस्ट्रेलिया द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय युद्ध अभ्यास ‘टैलिस्मन सेबर’ में भी सक्रिय भागीदारी की है। ‘इंडो-पैसिफिक एंडेवर’ के दौरान विशाखापत्तनम में दोनों सेनाओं ने संयुक्त व्यावसायिक आदान-प्रदान और मानवतावादी राहत, जंगल युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों पर चर्चा की थी। प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच गहरे संबंध हैं।
वहीं, ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी भारत के राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज, रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज और उच्च रक्षा ओरिएंटेशन कोर्स में नामांकित होते हैं। मिजोरम के वैरेंगटे स्थित काउंटर-इंसर्जेंसी और जंगल वारफेयर स्कूल में आयोजित होने वाला प्रशिक्षक विनिमय कार्यक्रम दोनों सेनाओं के सामरिक तालमेल को और मजबूत करता है।
रक्षा उद्योग के क्षेत्र में भी दोनों देशों का सहयोग बढ़ रहा है। भारतीय कंपनियों ने ऑस्ट्रेलिया को आईएसआर, मोबिलिटी और संरक्षित प्रणालियों जैसी सामरिक क्षमताएं निर्यात की हैं। साथ ही, आर्मी डिजाइन ब्यूरो और ऑस्ट्रेलिया के डिगर वर्क्स के बीच संयुक्त विकास के प्रयास चल रहे हैं।



