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Wednesday, January 28, 2026
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ऑस्ट्रियाई अर्थशास्त्री की भारत विभाजन की मांग, “Ex-India में तोड़ना चाहिए भारत”

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भारत पश्चिमी देशों की रुस से तेल न खरीदने की पाखंडी जिद का विरोध कर रहा है, जिसके चलते इन देशों से भारतीयों के खिलाफ नस्लवादी बयान भी दिए जा रहें है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टेर्रिफ का झटका देते हुए पश्चिमी देशों का पाखंड और हताशा जाहिर की है। दौरान ऑस्ट्रियाई अर्थशास्त्री गुंथर फेलिंगर-जान (Gunther Fehlinger-Jahn) के एक ट्वीट ने भारत में भारी आक्रोश भड़का दिया है। खुद को नाटो (NATO) के कथित विस्तार समिति का प्रमुख बताने वाले फेलिंगर ने सोशल मीडिया पर भारत को तोड़ने की मांग करते हुए लिखा,“मैं भारत को तोड़कर भूतपूर्व भारत बनाने का आह्वान करता हूँ। नरेंद्र मोदी रूसी आदमी हैं। हमें खालिस्तान के लिए आज़ादी के दोस्त चाहिए।”

उन्होंने इसके साथ एक विवादित नक्शा भी साझा किया, जिसमें भारतीय क्षेत्रों को पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और तथाकथित खालिस्तान के हिस्से के रूप में दिखाया गया। यह पोस्ट तेजी से वायरल हुई और भारत में राजनीतिक नेताओं समेत आम लोगों ने कड़ी नाराज़गी जताई।

शिवसेना (उद्धव गुट) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा,“यह कैसी पागलपन भरी सोच है? @MEAIndia को इस मामले को ऑस्ट्रियाई दूतावास के साथ उठाना चाहिए।” दौरान सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने फेलिंगर को एक “ऑनलाइन ट्रोल” करार दिया। एक पोस्ट में लिखा गया, “गुंथर फेहलिंगर-जान सिर्फ एक ट्रोल हैं। नाटो में कोई ऐसी आधिकारिक समिति नहीं है। यह सिर्फ एक स्वघोषित समिति है और वह खुद को उसका अध्यक्ष कहते हैं।” विवाद के बाद से फेलिंगर का एक्स (X) अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया है।

दौरान गुंथर का एक पुराना (2023 का) ट्वीट भी चर्चा में आ गया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भारत का अगला प्रधानमंत्री बनाने की वकालत की थी। उस ट्वीट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस और चीन का समर्थक बताया था।

विश्लेषकों का कहना है कि फेलिंगर के इस तरह के विवादित बयानों का कोई आधिकारिक महत्व नहीं है। फिर भी गुंथर फेहलिंगर जैसे लोगों के बयान यही साबित करता है की पश्चिमी देश के लोग आज भी औपनिवेशक कब्ज़ा ज़माने वाली मानसिकता से बाहर नहीं निकले है, उन्हें आज लगता है की भारत जैसा 140 करोड़ जनसंख्या का परमाणु संपन्न, भुखमरी से बड़ी संख्या में उभर चूका, तकनीक के क्षेत्र में उचाईयों को छूने में रत संप्रभु देश इनके रहमों करम पर जीवित है। और इनमें भारत के फैसले लेने, पलटने और भारत को बरबाद करने की क्षमता है।

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