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Wednesday, January 7, 2026
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पाक सेना के प्रतिबंध के बावजूद बलूच ने मनाया 78वां स्वतंत्रता दिवस!

बलूचिस्तान ने सोमवार को अपना 78वां स्वतंत्रता दिवस मनाया, जो बलूच मानवाधिकार समूहों द्वारा इस क्षेत्र पर पाकिस्तान के 'अवैध कब्जे' के दावे को चुनौती देता है।

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बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की लड़ाई का ऐतिहासिक महत्व है, जो 1947 में शुरू हुई जब ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद कलात रियासत ने अल्पकालिक स्वतंत्रता की घोषणा की थी। हालांकि, 1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र पर जबरन कब्जा कर लिया, जिसका बलूच राष्ट्रवादी लगातार विरोध करते रहे हैं।

स्वतंत्रता दिवस समारोह को दबाने के प्रयास में पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में 15 दिनों के लिए धारा 144 लागू की है, जिसका 6 करोड़ बलूच आबादी ने विरोध किया है।

प्रमुख बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने पाकिस्तानी सेना पर बलूचिस्तान में बिना किसी कानूनी अधिकार के तैनात होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सेना कानून या न्याय से नहीं, बल्कि लालच, दमन और बलूच पहचान को मिटाने की भूख से प्रेरित होकर तैनात है।

मीर ने पाकिस्तान पर बांग्लादेश, अफगानिस्तान और फिलिस्तीन में ‘युद्ध अपराधों’ का आरोप लगाया। उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद का ‘वैश्विक गॉडफादर’ करार देते हुए कहा कि यह देश चरमपंथियों को पनाह देता है, उग्रवादियों को प्रशिक्षण देता है और युद्ध अपराधियों को शरण देता है।

साथ ही, उन्होंने परमाणु खतरे को विश्व के खिलाफ ब्लैकमेल के रूप में इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया।

मीर ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के उस बयान की निंदा की, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान आधी दुनिया को खत्म कर सकता है। मीर ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया।
उन्होंने विश्व समुदाय से अपील की है कि वह यह याद रखे कि पाकिस्तान की आईएसआई ने ओसामा बिन लादेन को एबटाबाद में पूर्ण सरकारी संरक्षण में पनाह दी थी, जबकि हजारों निर्दोष लोगों का नरसंहार हो रहा था।

मीर ने कहा कि मुनीर जैसे लोगों के साथ हाथ मिलाने के बजाय, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उन पर मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए मुकदमा चलाना चाहिए।

बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की लड़ाई को याद करते हुए मीर ने कहा, “हजारों वर्षों से हमारे पहाड़, रेगिस्तान और समुद्र बलूच लोगों के साहस के गवाह रहे हैं, जिन्होंने मंगोल आक्रमणों से लेकर ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन तक अपनी जमीन की रक्षा की।

पांच लाख बलूच हमारी संप्रभुता की रक्षा में शहीद हुए हैं, जो विजय के लिए नहीं बल्कि अपनी जमीन पर स्वतंत्र रूप से जीने के अधिकार के लिए शहीद हुए हैं।”

मीर ने कहा कि जब तक बलूचिस्तान पर ‘कब्जा’ रहेगा, तब तक शांति नहीं पनप सकती। उन्होंने क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर करते हुए कहा कि बलूच लोगों का अपहरण, यातना, हत्या और दमन किया जा रहा है, उनके गांवों पर बमबारी की जा रही है, संसाधनों को लूटा जा रहा है और उनकी संस्कृति को नष्ट करने का लक्ष्य बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ये हमले न केवल बलूचिस्तान पर हैं, बल्कि उन सिद्धांतों के खिलाफ हैं जिन पर संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी।

78वें स्वतंत्रता दिवस पर मीर ने विश्व समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देने और पाकिस्तान को उसके युद्ध अपराधों, परमाणु ब्लैकमेल और आतंकवाद के सरकारी प्रायोजन के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूच लोगों के साथ खड़े होने का आह्वान किया, न कि उस ‘कब्जा करने वाली’ सेना के साथ, जो भ्रष्टाचार और हिंसा से वैश्विक शांति के लिए खतरा है।

मीर ने कहा, “भविष्य याद रखेगा कि कौन उत्पीड़ितों के साथ खड़ा था और कौन उत्पीड़कों के साथ। न्याय चुनें। शांति चुनें। बलूचिस्तान चुनें।”

 
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