“पानी बांटो वरना युद्ध झेलो”: बिलावल भुट्टो की गीदड़ भभकी

यह भी आरोप लगाया कि भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कमजोर करने के लिए FATF और आतंकवाद को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया।

“पानी बांटो वरना युद्ध झेलो”: बिलावल भुट्टो की गीदड़ भभकी

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पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष और पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने सोमवार (23 जून)को भारत को गीदड़ भभकी देते हुए कहा कि अगर भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के तहत पाकिस्तान को उसका हिस्सा नहीं दिया, तो पाकिस्तान को एक और युद्ध लड़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से सिंधु नदी से पानी रोकने की बात अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है।

बिलावल ने पाकिस्तान की संसद में कहा, “भारत के पास दो ही विकल्प हैं — या तो पानी न्यायपूर्वक बांटो, या फिर हम छह नदियों से अपना हिस्सा खुद ले लेंगे।” उन्होंने भारत पर सिंधु नदी पर हमला करने और जल संधि को एकतरफा खत्म करने का आरोप लगाया। “भारत का यह दावा कि सिंधु जल संधि खत्म हो चुकी है और फिलहाल प्रभाव में नहीं है — यह न केवल गलत है, बल्कि पूरी तरह अवैध है,” उन्होंने कहा।

भुट्टो ने यह भी आरोप लगाया कि भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कमजोर करने के लिए FATF और आतंकवाद को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया। बिलावल ने कहा, “जब पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट से वाइट लिस्ट में आया, तो भारत ने हमें फर्जी आरोपों और कूटनीतिक दबाव के जरिए फिर से ग्रे लिस्ट में डालने की पूरी कोशिश की।” भुट्टो का कहना है की, “अगर समन्वय नहीं हुआ और दोनों देश संवाद से इनकार करते रहे, तो हिंसा और भड़क सकती है,”

बिलावल का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में घोषणा की है  कि भारत 1960 की सिंधु जल संधि को अब बहाल नहीं करेगा। यह बयान 22 अप्रैल को पहलगाम को पाकिस्तानी मुसलमानों के आतंकी हमले के बाद दिया गया था, जिस हमलें में 26  हिंदुओ को मारा गया। इसी के बाद भारत ने संधि को अस्थायी रूप से निलंबित की है।

भुट्टो ने कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की पाकिस्तान की कोशिशों को सफल बता रहें है और दावा किया कि  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मसले पर मध्यस्थता की इच्छा जताई थी। बिलावल भुट्टो के इस बयान ने भारत-पाकिस्तान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण माहौल गंभीर बन सकता है, मात्र भारत पाकिस्तान से बात करने के मनोदशा में नहीं है।

भारत की ओर से अभी तक इस धमकी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि अब सिंधु जल संधि को पुनर्जीवित करने का कोई इरादा नहीं है।

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