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Friday, July 10, 2026
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बायोमेट्रिक यूपीआई लेनदेन जून में 600 मिलियन पार, रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज!

बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के तहत यूजर्स अपने स्मार्टफोन में फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान के माध्यम से बिना पिन के आसानी से लेनदेन कर सकते हैं।

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नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने बुधवार को कहा कि जून में बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन आधारित यूपीआई लेनदेन की संख्या 611 मिलियन से अधिक रही है और इन लेनदेन की कुल वैल्यू 25,416 करोड़ रुपए थी। यह दिखाता है कि यूपीआई का लेनदेन देश में तेजी से बढ़ रहा है।

बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के तहत यूजर्स अपने स्मार्टफोन में फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान के माध्यम से बिना पिन के आसानी से लेनदेन कर सकते हैं।

एनपीसीआई की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर-ग्रोथ, सोहिनी राजोला ने कहा कि बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन को तेजी से अपनाए जाने से पता चलता है कि यूपीआई यूजर्स आसान और कुशल पेमेंट अनुभव को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

जून में 600 मिलियन से अधिक ट्रांजैक्शन के साथ, इस सॉल्यूशन को अलग-अलग तरह के इस्तेमाल में, जिसमें यूपीआई पर रुपे क्रेडिट कार्ड भी शामिल है, काफी पसंद किया जा रहा है।

राजोला ने बताया, “कई बैंक और यूपीआई ऐप्स पहले से ही अपने ग्राहकों को बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की सुविधा दे रहे हैं। हमें उम्मीद है कि जैसे-जैसे ज्यादा यूजर्स पेमेंट के इस सुरक्षित और आसान तरीके को अपनाएंगे, इसका इस्तेमाल और बढ़ेगा।”

एनपीसीआई के अनुसार, यूपीआई यूजर्स रोजाना के पेमेंट के लिए बायोमेट्रिक-आधारित ऑथेंटिकेशन को तेजी से अपना रहे हैं। यह तेज, आसान और अधिक सुविधाजनक डिजिटल पेमेंट अनुभव की ओर एक बड़ा बदलाव है।

यह फीचर पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) और पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) दोनों तरह के पेमेंट को सपोर्ट करता है, जिससे यूजर्स के लिए रोजमर्रा के पेमेंट तेज और आसान हो जाते हैं।

यूपीआई पर रुपे क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए भी बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन उपलब्ध है। इससे यूपीआई के जरिए बिना पिन के क्रेडिट पेमेंट हो सकते हैं और क्रेडिट ट्रांजैक्शन में भी वही तेजी और सुविधा मिलती है जो सेविंग्स अकाउंट पेमेंट में मिलती है।

ऑन-डिवाइस फिंगरप्रिंट या फ़ेशियल रिकग्निशन का इस्तेमाल करके, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन यूपीआई पिन पर निर्भरता कम करता है, ट्रांजैक्शन तेजी से पूरे करने में मदद करता है और सफलता दर (सक्सेस रेट) को बेहतर बनाता है।

एनपीसीआई को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में भी इस फीचर का इस्तेमाल बढ़ता रहेगा, जिससे सुरक्षित और आसान डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में यूपीआई की स्थिति और मजबूत होगी।

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