अभी देश की नदियों को कचरा डंप की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। बूचड़खानों से खून जैसा पानी, घरों का सीवेज और फैक्ट्रियों से केमिकल वाला पानी कई नदियों में डाला जा रहा है। इस वजह से ये पवित्र नदियां नालों का रूप ले चुकी हैं। इस गंदे पानी की वजह से वॉटर पॉल्यूशन, एयर पॉल्यूशन और कई तरह की बीमारियां फैल रही हैं।
ऐसे में एक नौजवान ने इन नदियों को साफ करने का बीड़ा उठाया है। एनवायरनमेंटलिस्ट सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ ’बिट्टू तबाही’ उनका नाम है और वे आजकल यमुना नदी को साफ करने के लिए राजधानी दिल्ली पहुंचे हैं। इससे पहले उन्होंने मध्य प्रदेश में अजनार नदी की सूरत बदलकर ग्लोबल लेवल पर लोगों का दिल जीता था।
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिट्टू ने ‘वर्ल्ड क्लीनअप डे’ के मौके पर 20 सितंबर से यमुना बेसिन में सफाई अभियान शुरू किया है। बिट्टू ने इस अभियान के बारे में सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है और इस अभियान के बारे में डिटेल में जानकारी दी है। उनके इस पक्के इरादे की एक बार फिर पूरे देश में तारीफ हो रही है। इस खास ड्राइव के पहले दिन बिट्टू तबाही और उनके साथियों ने सिर्फ साढ़े चार घंटे की मेहनत के बाद यमुना के किनारे से 585 kg कचरा हटाया। इस सफाई ड्राइव के दौरान नदी किनारे के इलाके के लोकल लोगों ने भी बिट्टू का साथ दिया।
यमुना के किनारे बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, पूजा का सामान, निर्मल्या, मालाएं और दूसरा बेकार सामान फैला हुआ था। इस सारे कचरे का सही मैनेजमेंट करके पूरे इलाके को साफ किया गया। बिट्टू ने इस रोमांचक और प्रेरणा देने वाले अनुभव को अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया, और उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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बिट्टू के इस अहम कैंपेन को फिलिप मॉरिस ऑर्गनाइजेशन से काफी सपोर्ट मिला है। इससे पहले, अजनार नदी पर उनके काम को देखते हुए डच एनवायरनमेंटल ऑर्गनाइजेशन ‘द ओशन क्लीनअप’ के फाउंडर बोयान स्लेट ने उन्हें नौकरी ऑफर की थी, जबकि इंडस्ट्रियलिस्ट आनंद महिंद्रा ने भी सोशल मीडिया पर उनके काम की तारीफ की थी।
यमुना नदी का यह सफाई अभियान लगातार तीन दिनों तक चलेगा, और दिल्ली के बाद गुरुग्राम में खेड़की दौला उनका अगला पड़ाव होगा। बिट्टू तबाही ने एक बार फिर अपने कामों से साबित कर दिया है कि एक नौजवान अपनी सच्ची कोशिशों से देश के गंदे पानी के सोर्स को फिर से ज़िंदा कर सकता है।
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