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Friday, February 6, 2026
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कांग्रेस ने क्यों नहीं कम किये वैट, राहुल जी! कांग्रेस बन चुकी है जेबकतरा: BJP

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नई दिल्ली। कांग्रेस शासित राज्यों द्वारा पेट्रोल -डीजल के दामों पर से वैट कम नहीं किये जाने पर बीजेपी ने सवाल उठाया है। उसने पूछा कि कांग्रेस शासित राज्य वैट कम क्यों नहीं किये। बता दें  केंद्र सरकार द्वारा बुधवार को पेट्रोल और डीजल के उत्पाद शुल्क में कटौती की।  इसके बाद सभी बीजेपी शासित राज्यों ने वैट में कमी कर जनता को राहत दी लेकिन, कांग्रेस शासित राज्यों ने इस कोई ध्यान नहीं दिया। महाराष्ट्र में भी ठाकरे सरकार पर सवाल उठ रहे हैं कि क्यों नहीं यहां  इस तरह के कदम उठाये गए।

शुक्रवार को बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद बीजेपी शासित राज्यों ने वैट में कटौती करके आम जनता के बारे में सोचा उनके चेहरे पर मुस्कान आयी। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने पेट्रोल और डीजल में 12 रुपये कटौती की। आम आदमी के एकाउंट में 19 लाख करोड़ खातों में गया। देश के कर का सद्पयोग करते हुए राशन भारतीयों तक पहुंचाया। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पंजाब, दिल्ली छत्तीसगढ़ में वैट क्यों कम नहीं हो रही है, जबकि बीजेपी शासित राज्यों में कटौती हो रही है।  गौरव भाटिया ने कहा कि कांग्रेस की सरकारें आम जनता से जुड़ा ठोस फैसला क्यों नहीं ले पा रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि अशोक गहलोत जी बहुत दुख के साथ आपका ट्वीट पढ़ा, इनका दोहरा चरित्र और दोहरी राजनीति कैसे स्पष्ट हो जाती है। इन्होंने लिखा केंद्र द्वारा एक्साइज ड्यूटी कम करने के साथ राज्यो का वैट उसी अनुपात में कम हो जाता है। कांग्रेस शासित राज्य जनता को राहत क्यों नही देते हैं?

1 नवंबर को राहुल गांधी ट्वीट करते हैं जेबकतरों से सावधान। राहुल जी ऐसा प्रतीत हो रहा है, कांग्रेस ही जेब कतरा बन चुकी है। कांग्रेस लूट खसोट कर रही है। आज की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस आम जनता की यह उम्मीद कर रही है कि पश्चिम बंगाल, दिल्ली और कांग्रेस शासित राज्यों में वैट कम किया जाएगा। बता दें कि बीजेपी शासित राज्यों में हरियाणा, बिहार, असम, त्रिपुरा, मणिपुर, कर्नाटक, गोवा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड ने अपने यहां वैट कम  किये हैं। दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल की हुई कीमतों का असर सरकार के रेवन्यू पर भी पड़ेगा। समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार पर हर महीने 8,700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।

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