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Wednesday, June 3, 2026
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सीबीएसई मूल्यांकन विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, एनएसयूआई ने जांच मांगी!

एनएसयूआई का दावा है कि कई छात्रों को अपेक्षा से कम अंक मिले हैं, जबकि कुछ मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर भी सवाल उठे हैं।

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की कक्षा 12वीं की परीक्षा में डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली ((डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम) में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। यह याचिका कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की ओर से दाखिल की गई है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीबीएसई द्वारा अपनाई गई डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया और ओएसएम (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) प्रणाली में तकनीकी खामियों के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। एनएसयूआई का दावा है कि कई छात्रों को अपेक्षा से कम अंक मिले हैं, जबकि कुछ मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर भी सवाल उठे हैं।

एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ के माध्यम से दाखिल याचिका में ओएसएम प्रणाली से जुड़ी तकनीकी समस्याओं और छात्रों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई के संबंधित पोर्टल को कम से कम एक माह तक और खुला रखा जाए, ताकि प्रभावित छात्र अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि जिन छात्रों के अंक असामान्य रूप से कम आए हैं या जिनके परिणामों को लेकर स्पष्टता नहीं है, उन्हें अतिरिक्त अंक दिए जाएं। इसके अलावा, छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन के लिए नई सत्यापन विंडो उपलब्ध कराई जाए।

याचिका में विवादित उत्तर पुस्तिकाओं की फिजिकल रीचेकिंग और मैनुअल पुनर्मूल्यांकन की मांग भी की गई है। एनएसयूआई का कहना है कि जिन छात्रों को स्कैन की गई कॉपियों, डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया या अंकन प्रणाली पर संदेह है, उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए।

इसके साथ ही याचिका में मांग की गई है कि कक्षा 12वीं के परिणामों को प्रभावित करने वाली कथित गड़बड़ियों की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे छात्रों और अभिभावकों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बहाल होगा।

एनएसयूआई ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली हेतु मजबूत सुरक्षा उपाय, स्पष्ट प्रोटोकॉल और विस्तृत दिशानिर्देश तैयार करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही, जिन छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं कथित रूप से गायब, धुंधली या गलत तरीके से जांची गई हैं, उन्हें कम्पेनसेटरी मार्क्स दिए जाने का भी अनुरोध किया गया है।

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