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युद्ध में सफलता के लिए ‘सरप्राइज’ फैक्टर जरूरी : सीडीएस अनिल चौहान

समग्र सुरक्षा के लिए भूमि, विचारधारा और नागरिकों की सुरक्षा तीनों अनिवार्य हैं।

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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि युद्ध में सफलता हासिल करने के लिए ‘सरप्राइज’ एक बेहद अहम तत्व होता है। ‘भारत के समक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उन्होंने उरी सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और हालिया पहलगाम हमले के बाद की सैन्य प्रतिक्रिया का उदाहरण देते हुए बताया कि भारतीय सेनाओं ने हर बार दुश्मन को अप्रत्याशित तरीके से चौंकाकर अपने लक्ष्य पूरे किए।

सीडीएस ने कहा कि भारतीय सेनाएं “365 दिन, 24×7” के फार्मूले पर हमेशा सतर्क रहती हैं और आतंकवादियों को कहीं भी छिपने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक व्यापक विषय है जिसे अलग-अलग वर्ग और पेशेवर अपने दृष्टिकोण से देखते हैं ,राजनयिक इसे द्विपक्षीय या बहुपक्षीय परिप्रेक्ष्य में, अर्थशास्त्री आर्थिक दृष्टिकोण से, जबकि सैनिक का नजरिया अलग होता है।

उन्होंने आचार्य चाणक्य का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए चार प्रमुख खतरे होते हैं—आंतरिक, बाहरी, बाहरी सहयोग से आंतरिक और आंतरिक सहयोग से बाहरी खतरे। चौहान ने कहा कि समग्र सुरक्षा के लिए भूमि, विचारधारा और नागरिकों की सुरक्षा तीनों अनिवार्य हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने सैन्य सुरक्षा, राष्ट्रीय रक्षा और व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा के तीन घेरों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

जनरल चौहान ने कहा कि सैन्य तत्परता केवल हथियारों पर नहीं बल्कि रणनीतिक संस्कृति, अनुसंधान एवं विकास और रक्षा संसाधनों पर भी निर्भर करती है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा विश्वविद्यालय (National Defence University) की स्थापना को भविष्य के लिए अहम बताया। साथ ही जर्मन विद्वान का उद्धरण देते हुए कहा कि “युद्ध, राजनीति का ही विस्तार है”, इसलिए सैन्य और राजनीति को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।

उन्होंने बताया कि किसी भी देश की सैन्य क्षमता उसकी शांति काल में की गई रक्षा तैयारियों पर आधारित होती है। भारत ने गलवान और बालाकोट जैसे अभियानों में अपनी ताकत दिखाई। बालाकोट हमले के बाद पाकिस्तान ने एयर डिफेंस को मजबूत करने पर जोर दिया जबकि भारत ने लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों पर ध्यान केंद्रित किया।

सीडीएस ने ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया और कहा कि इसमें सेना को साफ निर्देश दिए गए थे कि केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बनाना है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन केवल बदला लेने के लिए नहीं था बल्कि धैर्य और संयम बनाए रखने का भी अभ्यास था।

राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों पर बोलते हुए चौहान ने कहा कि भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती सीमा विवाद है। पाकिस्तान और चीन से हुए युद्ध इसका ही परिणाम हैं। पाकिस्तान प्रॉक्सी वार और पड़ोसी देशों में अस्थिरता फैलाता है, वहीं युद्ध का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। भविष्य में तकनीकी आधारित, रोबोटिक्स और मानवरहित युद्ध देखने को मिल सकते हैं।

चौहान ने “न्यू नॉर्मल” नीति का जिक्र करते हुए कहा कि संकट के बाद जो नई स्थिति बनती है, वह स्थायी हो जाती है। उदाहरण के तौर पर कोविड के बाद वर्क फ्रॉम होम या नोटबंदी के बाद डिजिटल लेन-देन। परंतु राष्ट्रीय सुरक्षा में यह स्पष्ट है कि “आतंकवाद और बातचीत, व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते।”

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित ‘सुदर्शन चक्र’ वायु रक्षा प्रणाली का उल्लेख किया और कहा कि इसे 2035 तक पूरा करने का लक्ष्य है। यह प्रणाली तलवार और ढाल दोनों का काम करेगी। उन्होंने कहा कि एक सुरक्षित और सशक्त भारत ही वसुधैव कुटुंबकम की भूमिका निभा सकता है।

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