कोल इंडिया ने चिली यूनिट को दी मंजूरी, ₹6,300 करोड़ से अधिक निवेश पर मुहर

दुर्लभ मृदा तत्व और क्रांतिक खनिज पर फोकस:

कोल इंडिया ने चिली यूनिट को दी मंजूरी, ₹6,300 करोड़ से अधिक निवेश पर मुहर

Coal India has approved the Chile unit, giving the green light to an investment of over ₹6,300 crore.

भारत की महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटीकल मिनिरल्स) और दुर्लभ खनिजों की सुरक्षा रणनीति को मजबूती देते हुए कोल इंडिया लिमिटेड के बोर्ड ने चिली में एक इंटरमीडिएट होल्डिंग कंपनी की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इस यूनिट के जरिए कंपनी लिथियम और कॉपर जैसे रणनीतिक खनिज परिसंपत्तियों के अधिग्रहण की संभावनाएं तलाशेगी। दौरान भारत और चिली के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है।

एक नियामकीय फाइलिंग में कोल इंडिया ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित चिली यूनिट में उसकी 100 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी होगी। हालांकि, इस कंपनी की स्थापना DIPAM (निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग) और कोयला मंत्रालय की मंजूरी के अधीन रहेगी।

भारत-चिली FTA और रणनीतिक महत्व

हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया था कि भारत-चिली FTA वार्ता लगभग पूरी हो चुकी है। इस समझौते के बाद भारतीय कंपनियों को इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए जरूरी खनिजों तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।

चिली के पास लिथियम, कॉपर, रीनियम, मोलिब्डेनम और कोबाल्ट के विशाल भंडार हैं। ये सभी खनिज हाई-टेक और ग्रीन एनर्जी इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। ऐसे में कोल इंडिया का यह कदम केवल व्यावसायिक विस्तार नहीं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा के लिहाज से भी रणनीतिक माना जा रहा है।

कोयले से आगे बढ़ता कोल इंडिया

यह पहल कोल इंडिया का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय कदम है, जो उसकी पारंपरिक कोयला-केंद्रित पहचान से आगे निकलने के लक्ष्य को दिखता है। भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक बाजार में खनिजों की अस्थिर उपलब्धता के बीच भारत सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को विदेशी खनिज संपत्तियों में निवेश के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

इसी बैठक में कोल इंडिया बोर्ड ने दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) के साथ प्रस्तावित ऊर्जा संयुक्त उद्यम में ₹3,132.96 करोड़ की इक्विटी निवेश को भी मंजूरी दी। यह निवेश ₹20,886.40 करोड़ की कुल अनुमानित परियोजना लागत का हिस्सा है, जिसे 70:30 के ऋण-इक्विटी अनुपात में संरचित किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, यह संयुक्त उपक्रम देश की ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करने और बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में सहायक होगा, साथ ही वित्तीय अनुशासन भी बनाए रखेगा।

कोल गैसीफिकेशन और रसायन क्षेत्र में विस्तार

इसके अलावा, बोर्ड ने अपनी अनुषंगी कंपनी भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL) के लिए ₹3,189.54 करोड़ की पूंजी को भी हरी झंडी दी। यह राशि कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट परियोजना के लिए उपयोग की जाएगी। अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल खनन, कृषि और विस्फोटक उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है। यह परियोजना कोल इंडिया की वैल्यू एडिशन रणनीति और रसायन क्षेत्र में विविधीकरण को आगे बढ़ाती है।

इन सभी फैसलों के साथ कोल इंडिया ने ₹6,300 करोड़ से अधिक के निवेश को मंजूरी दी है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम कंपनी को मल्टी-एनर्जी और मिनरल्स प्लेयर के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम है।

जैसे-जैसे भारत-चिली FTA आगे बढ़ेगा, कोल इंडिया की चिली इकाई भारत की लिथियम और कॉपर जरूरतों को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। यह पहल न केवल कंपनी के लिए, बल्कि राष्ट्रीय रणनीतिक हितों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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