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Friday, January 23, 2026
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सब पे भारी ‘भगवाधारी’!

बाबा रामदेव ने पतंजलि की स्थापना के साथ एक नया बिजनेस मॉडल दिया, जहां अध्यात्म, स्वास्थ्य, राष्ट्रीय गर्व व कारोबार साथ साथ चलते हैं। पातंजलि मात्र एक ब्रांड नहीं, एक जन आंदोलन, एक संस्कृति, एक नए औद्योगिक आन्दोलन का नाम है।

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-प्रशांत कारुळकर

योग विधा का नाम पूरे विश्व में फैलाने वाले साधु वेशधारी व्यक्ति ने एक नया कारोबार शुरू किया, वो उस व्यवसाय का चेहरा बना, बाजार की नस पहचान कर चंद ही वर्षो में एक बड़े ब्रांड का निर्माण किया वही हैं बाबा रामदेव जी। उन्होंने बाजार की जरूरतें पहचानीं, नए उत्पाद निर्मित किए l जिसका मुकाबला अनुभवी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी नहीं कर सकीं। यह यात्रा वाकई चौंकाने वाली है। देश मे स्वदेशी अर्थक्रांती करने वाले इस ब्रांड का नाम पतंजलि है l

भारत के औद्योगिक इतिहास में एक योग गुरु का एफएमसीजी बाजार पर वर्चस्व जमाना केवल एक व्यावसायिक सफलता नहीं है – यह राष्ट्रीय गर्व, सांस्कृतिक पुनरुत्थान और जन आंदोलन भी है। बाबा रामदेव जी की प्रेरणा पर निर्मित पतंजलि ग्रुप एक ऐसी क्रांति है जिसका आधार आयुर्वेद, स्वदेशी वस्तुएँ व आत्मनिर्भरता पर रखा हुआ है।

दिल्‍ली के एक मित्र आदेश त्यागी, जो बाबा जी के शिष्य हैं, उनके माध्यम से मेरा भी उनके साथ सम्बन्ध हुआ। मुंबई, दिल्ली हर स्थान पर उनके साथ बातचीत होने लगी। साधु जैसा जीवन जीने वाली यह व्यक्ति असाधारण सूझबूझ रखने वाली शख्सियत भी है l हर नए प्रयास पर वही ऊर्जा लगाकर उसको बड़ा बनाया, यही उनके व्यक्तित्व की विशेषता है।जैसा उन्होंने योग जन जन तक पहुंचा। वही प्रयास उन्होंने आयुर्वेद पर भी किया।

पतंजलि की स्थापना : आरंभिक यात्रा

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की स्थापना 5 जनवरी 2006 को हरियाणा, हरिद्वार (उत्तराखंड) में हुई थी। इसका मुख्य लक्ष्य था, आयुर्वेद व स्वदेशी उत्पादनों का पुनरुत्थान करना, ये बाबा रामदेव जी व आचार्य बालकृष्ण जी का प्रमुख उद्देश्य है l

शुरुआत में पतंजलि केवल आयुर्वेदिक औषधियों व घर गृहस्थी की वस्तुएं ही निर्मित करता था, पर लोगों का विश्वास व बाबा रामदेव जी की लोकप्रियता ने इसका तेजी से विस्तार किया। लोग इन स्वदेशी उत्पादों की सराहना करने लगे l हर स्थान पर पतंजलि स्टोर्स नजर आने लगे।आज एफएमसीजी उत्पादों के क्षेत्र में पतंजलि ने अपना वर्चस्व प्रस्थापित किया हैl

आज पतंजलि एफएमसीजी क्षेत्र का एक बड़ा नाम है l औषधियों में, आयुर्वेदिक गोलियां, चूर्ण, सिरप, खाद्य पदार्थों मे आटा, चाय, बिस्कुट, नूडल्स, घी, मसाले, सौंदर्य प्रसाधन मे फेस वॉश, शैंपू, साबुन, टूथपेस्ट (दंत कांति) सहित घर की साफ-सफाई के लिए डिटर्जंट, डिश वॉश, फिनाइल, क्लीनर ये वस्तुएं भी इसका हिस्सा हैं। यहाँ तक की 2018 से वस्त्र निर्माण तक इसका विस्तार हुआ। यह यात्रा चौंकाने वाली है l

मात्र चंद वर्षों में पतंजलि ने इतना बड़ा वितरण जाल  कैसे बनाया ये अभ्यास का विषय है l  इसका एक बड़ा कारनामा ही है इसका स्टोर नेटवर्क l 10,000+ औषधालय, 52 वितरण केंद्र, 1 लाख+ खुदरा स्टोर, साथ ही Amazon, Flipkart, 1mg जैसे ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म पर भी इसका नाम हर घर पहुंचा दिया।

कंपनी का कारोबार हर साल नए शिखर पर पहुंचा है। वित्त वर्ष 2023-24 में पतंजलि आयुर्वेद का कारोबार 9335.32 करोड़ रुपये था – जो पिछले साल की तुलना में 23.15% अधिक था। पतंजलि फूड्स का कारोबार 31,961 करोड़ रुपये था। संस्थापकों ने अगले पांच वर्षों में एक लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है।

पतंजलि की सफलता का राज

पतंजलि की सफलता का ग्राफ चढ़ता ही आया है l इसके अनेक कारण हैं। सबसे बड़ा कारण बाबा रामदेव जी स्वयं हैं l उनके नाम ने पतंजलि की पहुंच घर घर तक पहुंचाई। फिल्में, खेल या राजनीति, हर व्यक्ति उनके साथ या उनके नाम पर विश्वास करता है। पर उसके प्रसार के लिए ना ही उन्होंने कभी फिल्मी कलाकार, खिलाड़ी या राजनेता का उपयोग नहीं किया l विपणन भी वही खुद करते हैं l चटाई पर आसन लगाकर चैलेंज या प्रतियोगिताएं करना इसका एक अनोखा उदाहरण है। इस कारण स्वदेशी के उपयोग को एक बल मिला है l

गत कुछ वर्षों में देशभर राष्ट्रीय भावना अधिक मजबूत हुई l इसका बड़ा लाभ पतंजलि को मिला। पतंजलि ने मध्यस्थता समाप्त किए l इसका माल निर्माता या किसानों तक पहुंचाता हुआ  कीमतें भी वाजिब रहती हैं, साथ ही कंपनी का मुनाफा भी अधिक रहता है। गांव पर इसका विशेष जोर रखा गया l  जहां इसका फैलना आसान था। गांव या कस्बे की हर दुकान पर आपको पतंजलि दंत कांति या उनके बिस्किट ज़रूर नजर आ जाएंगे।

हरिद्वार स्थित दिव्‍य फार्मेसी इसका मुख्य औषधि निर्माण केंद्र है l यहाँ 1000+ औषधियां निर्मित होती हैं। रुचि सोया नाम की एक बड़ी खाद्य तेल कंपनी 2019 में पतंजलि ने अधिग्रहित किया। 2023 में रुचि सोया का नाम बदलकर पतंजलि फूड्स रखा गया। आज इसका वार्षिक कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक है, साथ ही यह NSE व BSE पर भी सूचीबद्ध है। उत्तराखंड, नागपुर, तेलंगाना सहित कई राज्यों में पतंजलि ने अपने फूड पार्क स्थापित किए हैं।

आज पतंजलि की मुकाबला एचयूएल, Dabur, Colgate, Nestle जैसा बहुराष्ट्रीय कंपनियों साथ है। परंपरागत कंपनियों पर इसका प्रभाव इतना हुआ है कि उनके दांत भी खट्टे होने लगे हैं। कंपनी पर औषधियों की गुणवत्ता या उनके वैज्ञानिक प्रमाण पत्र पर प्रश्न भी उठाये गए। परंतु पातंजलि ने इसका मुकाबला किया – उसने R&D केंद्रें व आईएसओ-प्रमाणित प्रयोगशालाएं शुरू कीं। पतंजलि ने बार बार सुरक्षा, शुद्धता व गुणवत्ता पर ज़ोर दिया। कंपनी ने कीमतें भी नाममात्र रखी l जिसका नफा थोड़ा हुआ, पर ग्राहक अधिक जुड़े रहे।

बाबा रामदेव ने पतंजलि की स्थापना के साथ एक नया बिजनेस मॉडल दिया, जहां अध्यात्म, स्वास्थ्य, राष्ट्रीय गर्व व कारोबार साथ साथ चलते हैं। पातंजलि मात्र एक ब्रांड नहीं, एक जन आंदोलन, एक संस्कृति, एक नए औद्योगिक आन्दोलन का नाम है। आज हर नए भारतीय उद्यमी के लिए पतंजलि प्रेरणा है। मैंने भी उनके साथ कई बार बातचीत की है l उनके साथ अधिक अनुभवे एकत्र किए हैं। इच्छा है की पतंजलि का यह वटवृक्ष हरियाता रहे। यही हमारी दिल से शुभकामनाएं हैं।

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