31 C
Mumbai
Saturday, September 26, 2026
National Stock Exchange of India Limited
होमदेश दुनियाकेवल गाली देना कोई अश्लील कृत्य का अपराध नहीं है​ ? -...

केवल गाली देना कोई अश्लील कृत्य का अपराध नहीं है​ ? – सुप्रीम कोर्ट ​

अदालत ने कुछ लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 294 (बी) के तहत सार्वजनिक स्थान पर गाली-गलौज करने के आरोप में दायर आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। साथ ही अदालत ने एक उपयोगी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। यह साबित होना चाहिए कि दुर्व्यवहार किसी अन्य व्यक्ति के साथ किया गया था।

Google News Follow

Related

- Advertisement -National Stock Exchange

सुप्रीम कोर्ट ने एक ​मामले की सुनवाई के दरम्यान एक ​महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है कि केवल गाली देना, अपमानजनक और अपमानजनक शब्द बोलना आईपीसी की धारा 294 (बी) के तहत अश्लील कृत्य का अपराध नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह साबित किया जाना चाहिए कि किसी व्यक्ति द्वारा अपमानजनक शब्द या गाली देने का मकसद किसी को परेशानी में डालना है।

अदालत ने कुछ लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 294 (बी) के तहत सार्वजनिक स्थान पर गाली-गलौज करने के आरोप में दायर आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। साथ ही अदालत ने एक उपयोगी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। यह साबित होना चाहिए कि दुर्व्यवहार किसी अन्य व्यक्ति के साथ किया गया था। अदालत ने कहा कि सरकारी पक्ष को इस संबंध में सबूत पेश करने होंगे। इस मामले में पुलिस की ओर से ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया है।
कोर्ट ने साफ किया कि आईपीसी की धारा 294 (बी) के तहत अश्लीलता का अपराध किसी के खिलाफ दर्ज नहीं किया जा सकता क्योंकि सिर्फ अपशब्द और अपमानजनक शब्द बोले गए हैं। न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति जे. बी.परदीवाला की बेंच ने यह फैसला दिया है।
न्यायालय के समक्ष सुने गए मामले में कहीं भी यह नहीं देखा गया है कि अभियुक्तों ने अन्य व्यक्तियों को परेशान करने या उन्हें परेशान करने के इरादे से अपमानजनक शब्दों यानि अभद्र भाषा का प्रयोग किया है। सरकारी पार्टी द्वारा ऐसा कोई सबूत दायर नहीं किया गया है। साथ ही, अदालत ने आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के अपने फैसले की घोषणा की। एक महिला ने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी शिकायत को मानने से साफ इनकार कर दिया।
इससे यह स्पष्ट होता है कि इस मामले में आईपीसी की धारा 294(बी) के तहत मामला दर्ज करने के लिए आवश्यक साक्ष्य का अभाव है, अदालत ने यह राय व्यक्त करते हुए आवेदक आरोपी को बड़ी राहत दी है।
यह भी पढ़ें-

स्मृति मंधाना का विजयी छक्का और लंका ​का​​ ‘​ह​रण’​,​ जीता एशिया कप

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

150,243फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
335,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें