तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस से पहले यह चर्चा तेज़ हो गई है कि वे आज अपने उत्तराधिकारी को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा कर सकते हैं। यह मुद्दा न केवल तिब्बती समुदाय बल्कि वैश्विक राजनीति, खासकर भारत-चीन संबंधों के लिहाज़ से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। धर्मशाला में हो रहे सप्ताहभर के जन्मदिवस समारोह में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू जैसे वरिष्ठ भारतीय नेता शामिल हुए हैं, जिससे भारत सरकार के तिब्बती समुदाय के प्रति बढ़ते समर्थन के संकेत मिलते हैं।
चीन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि भारत या तिब्बती निर्वासन सरकार द्वारा घोषित किसी भी उत्तराधिकारी को मान्यता नहीं देगा। बीजिंग ने दलाई लामा को “विघटनकारी” करार दिया है और इस विषय पर संभावित घोषणा को लेकर सतर्कता बरत रहा है। हालांकि, दलाई लामा कई बार संकेत दे चुके हैं कि उनका उत्तराधिकारी चीन-शासित तिब्बत से नहीं, बल्कि “मुक्त विश्व” से होगा — जिसका मतलब स्पष्ट रूप से भारत या किसी अन्य लोकतांत्रिक देश से है।
दलाई लामा आज भाषण देंगे, और 11 बजे एक प्रेस बयान जारी होने की संभावना है, जिसमें उत्तराधिकार से संबंधित विषय पर कुछ स्पष्टता आ सकती है।
दलाई लामा ने इस वर्ष प्रकाशित अपनी पुस्तक में लिखा है, “नए दलाई लामा का जन्म मुक्त विश्व में होगा ताकि वे करुणा के सार्वभौमिक संदेश, तिब्बती बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक नेतृत्व और तिब्बती आकांक्षाओं के प्रतीक के रूप में अपनी परंपरागत भूमिका निभा सकें।” इसके अलावा, इस सप्ताह की शुरुआत में उन्होंने कहा था, “मेरे जीवन के शेष वर्ष दूसरों के लाभ के लिए समर्पित रहेंगे। उत्तराधिकार संस्था की निरंतरता को लेकर एक ढांचा तैयार किया जाएगा।”
1959 में चीन के खिलाफ तिब्बती विद्रोह विफल होने के बाद, दलाई लामा भारत आए और धर्मशाला में निर्वासन में रहने लगे। यहीं से तिब्बती सरकार-इन-एग्ज़ाइल संचालित होती है। 2020 में भारत-चीन सीमा तनाव के बाद, भारत सरकार ने तिब्बती आंदोलन के साथ अपने जुड़ाव को पुनः मजबूत करना शुरू किया है। हालिया समारोह में भारतीय नेताओं की उपस्थिति उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
जैसे-जैसे दलाई लामा की उम्र बढ़ रही है, उत्तराधिकारी का सवाल वैश्विक और भू-राजनीतिक रूप से अहम बनता जा रहा है। यदि आज कोई घोषणा होती है, तो यह न केवल तिब्बती बौद्धों के लिए एक नया युग शुरू करेगी, बल्कि भारत-चीन रिश्तों में भी नई हलचल ला सकती है। दुनिया भर की निगाहें आज धर्मशाला पर टिकी हैं।
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